दुनिया का वातावरण कौन सुधारेंगे? इन्द्रियों से सुख लेने वाले या मन-बुद्धि से सुख लेने वाले? VCD:2235
अध्यात्म विद्या रहस्य [ सार- विस्तार-सार ]
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दुनिया का वातावरण कौन सुधारेंगे? इन्द्रियों से सुख लेने वाले या मन-बुद्धि से सुख लेने वाले? VCD:2235
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अध्यात्म विद्या रहस्य [ सार- विस्तार-सार ]
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जो संगमयुगी लक्ष्मी-नारायण दिखाये हैं ज्ञान वलय के अंदर, वो आंखों की रसना लेने वाले हैं या मन-बुद्धि की रसना लेने वाले हैं?
दुनिया का वातावरण कौन मज़बूत बनायेंगे और कौन कमजोर बनाएंगे?
क्या बताया? स्वधर्मे निधनम श्रेय: ...तुम्हारी जो आत्मा का धर्म है उसमें टिकना श्रेष्ठ है। इसके अलावा जो भी धारणाओं में टिकने वाले हैं, वो उतने श्रेष्ठ नहीं है। कहेंगे नंबरवार भ्रष्ट है। देखो तुम आत्मिक स्थिति में टिकते हो। तो आत्मिक स्थिति में टिकने वाली आत्माएं वाइब्रेशन जास्ती मजबूत बनाएंगी या इंद्रियों की स्थिति में टिकने वाली आत्माएं जास्ती पावरफुल वाइब्रेशन बनाएंगी? आत्मिक स्थिति में टिकने वाले तुम बच्चे जो लक्ष्मी-नारायण के चित्र में दिखाया है। लक्ष्मी-नारायण एक दूसरे को ज्ञानेंद्रियों के द्वारा रस लेते हुए नीचे गिरते हैं या नहीं गिरते हैं? लक्ष्मी-नारायण के चित्र में जो ज्ञान के वलय में दिखाए हुए लक्ष्मी-नारायण हैं, वो ज्ञान की रोशनी का वलय जो दिखाया है, उनकी ज्ञान की दुनिया है इसलिए उनका नाम ही पड़ता है --नारायण= नार+अयन, नार माने जल, ज्ञान जल अयन माने घर। कहां रहते हैं? ज्ञान जल ही उनका घर है। तो जिनका ज्ञान ही घर है, वो मन-बुद्धि के आधार पर वहां रहने वाले हैं या दृष्टि की रसना लेने वाले हैं?
जो संगमयुगी लक्ष्मी-नारायण दिखाये हैं ज्ञान वलय के अंदर, वो आंखों की रसना लेने वाले हैं या मन-बुद्धि की रसना लेने वाले हैं? मन-बुद्धि की रसना लेने वाले हैं। तो, वो दुनिया का वातावरण मजबूत बनाएंगे या इंद्रियों की रसना लेने वाले दुनिया का वातावरण मजबूत बनाएंगे? कौन मजबूत बनाएंगे? कौन कमजोर बनाएंगे? जो मनसा को कंट्रोल करते हैं, बुद्धि को एकाग्र करते हैं, वो दुनिया का वातावरण ऐसा मजबूत बनाते हैं,कि प्रकृति के पांच जड़ तत्वों को भी सात्विक बना देते हैं। संगमयुगी लक्ष्मी-नारायण कौन सा सुख ले रहे हैं? ध्यान से देखो उनको। मन-बुद्धि का सुख अतीइंद्रिय सुख में रमे हुए हैं या ज्ञानेंद्रियों-कर्मेंद्रियों के सुख में रमण कर रहे हैं?
ज्ञानेंद्रियों में आंखें हैं सबसे श्रेष्ठ उन आंखों का रस ले रहे हैं? देखो ध्यान से। आंखों का रस नहीं ले रहे हैं। तो संगमयुग में लगातार उनकी चढ़ती कला रहती है या गिरती कला में भी आते हैं? चढ़ती कला है। 16 कला संपूर्ण से भी ऊपर की कला। क्योंकि उनका जो बाप है [सूर्यवंशियों का बाप कौन है?] ज्ञान सूर्य, सूर्य कलाओं में बंधा हुआ होता है या कलातीत होता है? कलातीत होता है। कलातीत कल्याण कल्पांतकारी कहा गया है। माना वो जब इस सृष्टि पर आता है, तो जिस मुकर्रर मनुष्य तन में प्रवेश करता है, उसको कैसा बनाता है? आप समान कलातीत और सारी दुनिया का कल्याणकारी बाप बनाता है। सारी दुनिया उसे स्वीकार करती है।
तो ऐसी स्टेज बनाने वाला बाप हमको सदाकाल की चढ़ती कला में ले जाने वाला है। उसके बाद सतयुग का प्रारंभ होता है। उसमें पहला-पहला जन्म किसका होता है? राधा-कृष्ण का होता है। लक्ष्मी-नारायण के चित्र के नीचे जो लक्ष्मी-नारायण नर से नारायण नारी से लक्ष्मी बनते हैं, उनके नीचे राधा-कृष्ण का चित्र दिखाया हुआ है। वो आंखों का रस ले रहे हैं या मन-बुद्धि का रस ले रहे हैं? इंद्रियों का रस ले रहे हैं।
तो इंद्रियों की रसना लेने से जो सृष्टि की पैदाइश करते हैं वो सृष्टि नीचे जाने वाली बनेगी या ऊंची जाने वाली बनेगी? नीचे जाने वाली। कृष्ण के बाद, राधा के बाद, जो भी आत्माएं परमधाम से नीचे उतरती हैं, वो उत्तरोत्तर राधा-कृष्ण के साथ ही साथ उतरती कला वाली होती जाती हैं या कला स्थिर रहती है? पहले जन्म में ही, पहले जन्म के अंतिम छोर तक उन आत्माओं की चौथाई कला कम हो जाती है। कारण क्या हुआ है? इंद्रियों का सुख लिया,भले श्रेष्ठ इंद्रियों का सुख लिया। फिर भी वो इंद्रियों का सुख लेने से सृष्टि तो बढ़ती है, लेकिन नीचे उतरती है या ऊपर चढ़ती है? नीचे उतरती है।
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