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देवनगरी के देवदर्शन पार्ट -659 "श्री सर्वेश्वरी माताजी का अतिप्राचीन मंदिर, गांव-गोल , सिरोही -राज०

जीव से शिव तक यात्रा

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देवनगरी के देवदर्शन पार्ट -659 "श्री सर्वेश्वरी माताजी का अतिप्राचीन मंदिर, गांव-गोल , सिरोही -राज०

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जीव से शिव तक यात्रा
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देवनगरी के देवदर्शन पार्ट - 659 " श्री सर्वेश्वरी माताजी का अतिप्राचीन मंदिर , गांव - गोल , जिला - सिरोही , राजस्थान " सिरोही मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर 'गोल' गांव है जहां श्री सर्वेश्वरी माताजी जी का अतिप्राचीन मंदिर है । गोल गांव सहस्त्र ओदिच्य गोरवाल ब्राह्मणों का गांव है । श्री सर्वेश्वरी देवी माताजी का मंदिर की स्थापना गोल गांव की स्थापना के साथ हुई । श्री माताजी का शिखरबंद मंदिर के प्रति गांव वालों की गहरी आस्था है । यहां नियमित पूजा पाठ जप तप चलते रहने से यह क्षेत्र तपोभूमि है । यहां पहुंचने से मन को शांति मिलती है । श्री रमेश जी भट्ट साहब ने बताया कि ब्राह्मणो को जागीरी मे मिला गांव जब ब्राह्मणो ने बसाया था तब कुलदेवी के रुप मे श्री सर्वेश्वरी माताजी को भी यहां विराजमान किया था । श्री सर्वेश्वरी माताजी भारद्वाज गोत्र की भी कुलदेवी है । श्री सर्वेश्वरी माताजी ही श्री ब्राह्मणी माताजी है । युवा पुजारी जी श्री मुकेश कुमार दवे यहां की पूजा करते हैं । गोल गांव का संबंध गुजरात के सिद्धपुर से - गुजरात के राजा श्री सिद्धराज सोलंकी जी ने श्री रुद्रमाल की स्थापना करने के लिए उत्तर भारत ( उत्तर काशी , हिमाचल , काश्मीर आदि ) से 1000 विद्वान कर्मकांडी ब्राह्मणो को को विशाल यज्ञ के लिए बुलवाया । चुंकि ये 1000 की संख्या मे आये थे इसलिए इनके नाम के साथ सहस्त्र ( एक हजार होने से ) जुड गया और ये सहस्त्र ओदिच्य गोरवाल ब्राह्मण हो गये । श्री रमेश जी भट्ट साहब ने बताया कि आगे चलकर ये सिद्धपुर से सिरोही आये जहां उनको गोल गांव की जागीरी मिली । गोर (शादी विवाह , यज्ञ , कर्मकांड आदि) करवाने से इनका नाम गोरवाल ब्राह्मण पडा । गोर गांव से गोल गांव हुआ - गोरवाल ब्राह्मणों की जागीरी के इस गांव का नाम पहले 'गोर' गांव था जो कालांतर मे अपभ्रंश होकर 'गोल' गांव हो गया । भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और सिरोही रियासत के प्रथम मुख्यमंत्री और सिरोही के माउंट आबू को गुजरात मे विलय होने से बचाने वाले श्री गोकुल भाई भट्ट साहब , भारत के महान इतिहासकार श्रीमान गोरीशंकर हीराचंद जी ओझा साहब भी सहस्त्र ओदिच्य गोरवाल ब्राह्मण थे । सिरोही निवासी श्री हरीश दवे साहब भी इसी समाज से आते हैं । शिलालेख और बावडी - इस गांव मे मंदिर के पास कई शिलालेख हैं जो यहां की प्राचीनता को बताते हैं । मंदिर के पास यहां एक अतिप्राचीन भव्य बावडी भी है जो आज भी अच्छी हालत मे है । आप देखते रहे देवनगरी के देवदर्शन #Sirohi Temples और इस चैनल को Subscribe करें , बेल आइकन दबाएं ताकि हमारी यात्रा के हर वीडियो आपतक पहुंचे । राजेन्द्र सिंह नरुका ' आनंद ' #Sirohi Temples