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105. आत्मानुशासन (छंद-123, 124)

प्रयंक शास्त्री

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105. आत्मानुशासन (छंद-123, 124)

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प्रयंक शास्त्री
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123. ज्ञानियों का तप और श्रुत के प्रति अनुराग कल्याणकारी है 124. अशुभराग में दोष की अधिकता