वैष्णो माता रानी की चमत्कारी गाथा | नवरात्रि विशेष
Bharat Ki Amar Kahaniyan
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वैष्णो माता ने एक बार श्रीधर पंडित और उसकी पत्नी अनुराधा को उद्धार करने का माध्यम बनाया। श्रीधर के पास कोई संतान नहीं थी लेकिन वो इसकी चिंता नहीं करते थे बल्कि वो राज्य में फैली चेचक की बीमारी की चिंता से माता वैष्णो से प्रार्थना करते थे। श्रीधर की माता अनुराधा को संतान ना होने की बात पर कोसती थी जिस से दुःखी होकर वह एक रात अपने प्राण देने के लिए कुएँ की ओर बढ़ी तो वहाँ एक कन्या उसे रोक देती है। वह कन्या अनुराधा को बताती है की वह बाँझ नहीं है और वह अवश्य ही संतान को जनम देगी। श्रीधर वहाँ आता है तो वह कन्या वहाँ से चली जाती है। अनुराधा कन्या की बात श्रीधर को बताती है तो वह प्रसन्न हो जाता है। अनुराधा कन्या की बात श्रीधर को बताती है तो वह प्रसन्न हो जाता है और अपने गाँव के लोगों में ख़ुशी में लड्डू बाँटता है। लोग श्रीधर का मज़ाक़ उड़ाते हैं। श्रीधर माता से प्रार्थना करता है और पूछता है की उनके संतान कब होगी तो माता उसे दर्शन देती है और उसे पाने साथ लेकर पर्वत पर अपनी गुफा के पास ले आती हैं। श्रीधर और अनुराधा गुफा में अंदर जाते है और माता की की पिंडियों के दर्शन करते हैं। दोनों पति पत्नी वहाँ की सफ़ाई करते हैं और वापस अपने घर आ जाते हैं। रात्रि में श्रीधर को सपने में माता वैष्णवी और भैरव के साथ हुई घटना का दृश्य उसे दिखाती हैं। श्रीधर सारी बात अपनी पत्नी अनुराधा को बताता है की हम दोबारा अवश्य जाएँगे और सारी बातें जो मैंने सपने में देखी हैं उनके प्रमाण वहीं मिलेंगे। श्रीधर और अनुराधा दोनों त्रिकुट पर्वत की गुफा पर जाते हैं और अपने स्वप्न में दिखे सभी दृश्यों को वहाँ जाकर बताता है। दोनों पति पत्नी गुफा के अंदर जाते हैं और माता की पिंडियों के पास जाकर माता लक्ष्मी को प्रणाम करते हैं तभी उसे देवी माता लक्ष्मी, माता काली और माता सरस्वती अपने असली रूप के दर्शन देती हैं। तीनों माता एक कन्या का रूप ले लेती हैं और वैष्णो रूप में दोनों को दर्शन देती हैं। माता वैष्णवी दोनों को आशीर्वाद देती हैं और आने स्थान का महत्व बताती हैं और उनसे कहती हैं की मेरे इस स्थान के बारे में सभी लोगों तक पहुँचाओ। दोनों वापस अपने गाँव में आकर सबको माता की कृपा और गुफा के बारे में बताते हैं गाँव के लोग उनकी बात को नहीं मानते और उन्हें संतान हीन कह कर अपमानित करते हैं तो श्री डर उन्हें समझाता है की आप मेरा यक़ीन करे वहाँ माता की पिंडियाँ हैं। सभी उनकी बात माँ लेते हैं और माता वैष्णों के दर्शनों के लिए त्रिकुट पर्वत की ओर चल पड़ते हैं। माता के आशीर्वाद से सभी लोग के दुःख और कष्ट माता के दरबार में जाकर समाप्त हो जाते हैं।