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परमात्मा के द्वार तक पहुँचकर भी लोग लौट क्यों जाते हैं? | ओशो | अष्टावक्र गीता

अद्भुत विचार

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परमात्मा के द्वार तक पहुँचकर भी लोग लौट क्यों जाते हैं? | ओशो | अष्टावक्र गीता

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परमात्मा के द्वार तक पहुँचकर भी लोग लौट क्यों जाते हैं? | ओशो | अष्टावक्र गीता मनुष्य परमात्मा को पाने के लिए जन्मों-जन्मों तक खोज करता है, लेकिन जब वह परमात्मा के द्वार के बिल्कुल पास पहुँच जाता है, तब अचानक उसे भय पकड़ लेता है। क्योंकि परमात्मा मिल जाने के बाद उसकी पुरानी पहचान, उसका अहंकार और उसकी सारी खोज समाप्त हो जाएगी। ओशो, अष्टावक्र गीता के इस गहरे प्रवचन में बताते हैं कि द्रष्टा का अनुभव जीवन को भीतर से हिला सकता है। जब पहली बार भीतर की आँख खुलती है, तब दृश्य, दर्शक और द्रष्टा—तीनों की सीमाएँ टूटने लगती हैं। मनुष्य को लगता है कि उसका पूरा संसार बिखर गया है, लेकिन वास्तव में पहली बार उसके भीतर सत्य की झलक दिखाई देती है। समझने के लिए भीतर एक ऐसा हृदय चाहिए जो प्रेम से खुला हो। रवीन्द्रनाथ की सुंदर कथा के माध्यम से ओशो बताते हैं कि एक व्यक्ति अनेक जन्मों तक परमात्मा को खोजता रहा। अंततः वह परमात्मा के द्वार तक पहुँच गया, लेकिन द्वार खटखटाने से ठीक पहले उसे डर लगा—“अगर परमात्मा मिल गया, तो फिर मैं क्या करूँगा?” वह व्यक्ति परमात्मा के द्वार से लौट गया और फिर उसी द्वार को छोड़कर हर जगह उसे खोजता रहा। इस वीडियो में आप जानेंगे • भीतर की आँख खुलने पर भय और बेचैनी क्यों उत्पन्न हो सकती है। • दृश्य, दर्शक और द्रष्टा के समाप्त होने का आध्यात्मिक अर्थ। • परमात्मा के करीब पहुँचकर मनुष्य पीछे क्यों हट जाता है। • केवल बुद्धि और तर्क से सत्य का अनुभव क्यों नहीं होता। • प्रेम, श्रद्धा और तैयारी परमात्मा के अनुभव के लिए क्यों आवश्यक हैं। • रवीन्द्रनाथ की परमात्मा के द्वार वाली कथा का गहरा अर्थ। • हम परमात्मा को हर जगह खोजते हैं, लेकिन अपने भीतर क्यों नहीं देखते। वीडियो अध्याय 00:00 — द्रष्टा की याद और अचानक लड़खड़ाहट 02:00 — दृश्य, दर्शक और द्रष्टा का समाप्त होना 03:30 — भीतर की आँख खुलने का अनुभव 06:00 — अनुभव को समझने के लिए शब्दों की आवश्यकता 08:00 — बुद्धि से नहीं, प्रेम से सुनो 10:30 — परमात्मा को झेलने की तैयारी 13:30 — परमात्मा के करीब आते ही भय क्यों लगता है? 15:00 — परमात्मा के द्वार की रवीन्द्रनाथ कथा 17:00 — हम परमात्मा को छोड़कर हर जगह खोजते हैं यदि यह संदेश आपके भीतर कोई प्रश्न जगाता है, तो वीडियो को Like करें, अपने प्रियजनों के साथ साझा करें और ऐसे ही गहरे आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए चैनल को Subscribe करें। अपने अनुभव और विचार टिप्पणी में अवश्य लिखें। विषय: अष्टावक्र गीता, द्रष्टा, आत्मज्ञान, परमात्मा, प्रेम और ध्यान भाषा: हिंदी शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक उद्देश्य संबंधी सूचना यह वीडियो केवल शैक्षणिक, आध्यात्मिक, ज्ञानवर्धक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रयुक्त ऑडियो, चित्र, उद्धरण अथवा अन्य सामग्री का कोई भाग यदि किसी तृतीय पक्ष से संबंधित है, तो उसके सभी अधिकार संबंधित मूल अधिकारधारकों के पास सुरक्षित हैं। ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के उद्देश्य से उपयोग किया गया है। यदि किसी अधिकारधारक को इस सामग्री के उपयोग पर आपत्ति हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें। हम उचित आपत्ति का सम्मान करते हुए आवश्यक श्रेय, संशोधन या सामग्री हटाने की कार्रवाई करेंगे। यह सूचना अपने-आप में कॉपीराइट अनुमति, लाइसेंस या Fair Use/Fair Dealing का प्रमाण नहीं है। सामग्री का उपयोग संबंधित अधिकारों, अनुमति और लागू कानूनों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अष्टावक्र गीता, अष्टावक्र गीता हिंदी, ओशो प्रवचन, ओशो हिंदी प्रवचन, परमात्मा के द्वार, परमात्मा मिल जाए तो, द्रष्टा का अनुभव, भीतर की आंख, आत्मज्ञान, साक्षीभाव, ध्यान, प्रेम और श्रद्धा, परमात्मा की खोज, Osho Hindi Discourse, Ashtavakra Gita Hindi, Osho Pravachan, spiritual awakening Hindi, self realization Hindi