जब तुम पूरी तरह हार जाते हो, तभी प्रभु मिलते हैं | Osho की गहरी बात
अद्भुत विचार
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जब तुम पूरी तरह हार जाते हो, तभी प्रभु मिलते हैं | Osho की गहरी बात
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जब तुम पूरी तरह हार जाते हो, तभी प्रभु मिलते हैं | Osho की गहरी बातDescription
जब मनुष्य अपनी ओर से पूरा प्रयास कर लेता है और फिर भी सफलता उसके हाथ नहीं आती, तब उसे निराश नहीं होना चाहिए। उसी क्षण समर्पण का द्वार खुलता है।
इस अंश में Osho बताते हैं कि प्रयत्न और प्रभु-कृपा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। मनुष्य को अपनी ओर से पूरी शक्ति लगानी है, लेकिन परिणाम को अपनी मुट्ठी में रखने का अहंकार छोड़ना है।
इसके बाद Osho “रामलीला” का आंतरिक अर्थ समझाते हैं। शरीर सीता है, आत्मा राम है और इनके भीतर चल रहा पूरा जीवन एक लीला है। जिस दिन मनुष्य यह पहचान लेता है कि वह इस लीला का पात्र नहीं, बल्कि उसका साक्षी है, उसी दिन मुक्ति, मोक्ष और निर्वाण का अनुभव शुरू होता है।
मुख्य विचार:
प्रयत्न करो, लेकिन परिणाम को छोड़ दो।
जीवन को भोगो मत—उसे साक्षी बनकर देखो।
तुम कहानी नहीं हो, कहानी को देखने वाले हो।
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