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कुल की परंपराएँ टूटने पर क्या होता है? | श्रीमद्भगवद्गीता Part 42| krishna seekh| gita sar

Bhagvad Gita

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कुल की परंपराएँ टूटने पर क्या होता है? | श्रीमद्भगवद्गीता Part 42| krishna seekh| gita sar

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गीता श्लोक 41 | कुल की परंपराएँ टूटने पर क्या होता है? | श्रीमद्भगवद्गीता Part 42 📝 Description श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1 | श्लोक 41 | PART 42 पिछले भाग में अर्जुन ने बताया था कि अधर्म के बढ़ने से परिवार और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस भाग में अर्जुन अपनी चिंता को आगे बढ़ाते हुए बताते हैं कि कुल की परंपराएँ और धार्मिक कर्म कमजोर पड़ने पर परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। 📖 श्लोक 41: सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च। पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः॥ 🙏 जानिए कुरुक्षेत्र में अर्जुन के धर्म-संकट और उनके द्वारा श्रीकृष्ण के सामने रखे गए तर्कों को सरल भाषा में। वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें। 🔥 Hashtags #श्रीमद्भगवद्गीता #भगवद्गीता #गीता #गीता_श्लोक #गीता_ज्ञान #श्रीकृष्ण #अर्जुन #महाभारत #कुरुक्षेत्र #धर्म #सनातनधर्म #कृष्णवाणी #आध्यात्मिकज्ञान #Part42