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गीता श्लोक 38 | जब दोष दिख रहा है तो पाप से क्यों न बचें? |Mahabharat| bhagvad gita

Bhagvad Gita

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गीता श्लोक 38 | जब दोष दिख रहा है तो पाप से क्यों न बचें? |Mahabharat| bhagvad gita

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गीता श्लोक 38 | जब दोष दिख रहा है तो पाप से क्यों न बचें? |Mahabharat| bhagvad gita Description श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1 | श्लोक 38 | PART 39 पिछले भाग में अर्जुन ने बताया कि लोभ से प्रभावित लोग कुल-विनाश और अपने ही संबंधियों के विरुद्ध जाने के दोष को नहीं देख पा रहे हैं। इस भाग में अर्जुन श्रीकृष्ण से एक महत्वपूर्ण प्रश्न करते हैं—जब हमें कुल-विनाश का दोष स्पष्ट दिखाई दे रहा है, तो फिर हम इस पाप से पीछे क्यों न हटें? 📖 श्लोक 38: कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन॥ 🙏 जानिए अर्जुन के मन में चल रहे धर्म-संकट और कुरुक्षेत्र में उनके विचारों को सरल रूप में। वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें। 🔥 Hashtags #श्रीमद्भगवद्गीता #भगवद्गीता #गीता #गीता_श्लोक #गीता_ज्ञान #श्रीकृष्ण #अर्जुन #महाभारत #कुरुक्षेत्र #धर्म #सनातनधर्म #कृष्णवाणी #आध्यात्मिकज्ञान #Part39