138वीं पावन जन्म-जयन्ती : अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज | विश्वशान्ति वैदिक महायज्ञ
Vihangam Yoga
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138वीं पावन जन्म-जयन्ती : अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज | विश्वशान्ति वैदिक महायज्ञ
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विहंगम योग के प्रणेता अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की 138वीं पावन जन्म-जयन्ती के अवसर पर 5101 कुण्डीय विश्वशान्ति वैदिक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है। प्राचीन काल से चले आ रहे इस वैदिक महायज्ञ से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दोनों रूप से सभी जग-जीवों को अनेक लाभ होते हैं। इस हवन-यज्ञ से जलवायु की शुद्धता, पर्यावरण का संरक्षण एवं शारीरिक स्वस्थता के साथ-साथ भौतिक कामनाओं की पूर्ति भी समय से अवश्य होती है। इस प्रकार विहंगम योग संस्थान के माध्यम से भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण किये जाते हैं।
📌कार्यक्रम स्थल : गोगना मैदान (छठघाट), मैथन डैम, धनबाद (झारखण्ड)
📅दिनांक : 13 अगस्त 2025
@vihangamyoga | Vedic Hawan Yajana
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विहंगम योग के प्रणेता अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज एक ऐसे अलौकिक व्यक्तित्व वाले महर्षि हैं, जिन्होंने नित्य अनादि सद्गुरु से ब्रह्मविद्या की ज्ञानधारा को प्राप्त कर सम्पूर्ण विश्व की मानवता के आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। सद्गुरुदेव ने साधना की गहराई में प्रवेश कर अध्यात्म के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त किया। अपने समाधिजन्य अनुभवों के आधार पर पैंतीस आध्यात्मिक सद्ग्रन्थों का सृजन कर अध्यात्म के बाह्य एवं आभ्यन्तर भेद-साधन का रहस्य अनावृत किया।
विहंगम योग अपनी सशक्त साधना-पद्धति के लिए जाना जाता है। यह एक ऐसी पद्धति है जो मात्र 10 मिनट के नियमित अभ्यास के द्वारा आपकी पूर्ण आत्मिक शक्ति को जागृत कर देती है। इतना ही नहीं, इस विलक्षण पद्धति के अभ्यास हेतु आपको कोई असामान्य जीवनशैली अपनाने की भी आवश्यकता नहीं है। विहंगम योग संस्थान की स्थापना सन् 1924 ई० में सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज ने की थी। आज देश-विदेश में स्थित सैकड़ों केन्द्र लाखों लोगों को सेवा प्रदान कर रहे हैं। अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज द्वारा प्रणीत ब्रह्मविद्या विहंगम योग के द्वारा मानव-जीवन के पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। आन्तरिक शान्ति का मार्ग ध्यान से प्रशस्त होता है। विहंगम योग साधना-पद्धति से जुड़कर आज लाखों व्यक्ति अपने आध्यात्मिक जीवन का निर्माण कर रहे हैं।
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