Glories of Srila Bhakti Dayita Madhav Goswami Maharaj
Hari Katha Amrit
0:00 / 0:00
Glories of Srila Bhakti Dayita Madhav Goswami Maharaj
815 просмотров · 1 г. назад
Hari Katha Amrit
3,36 тыс. подписчиков
815 просмотров · 1 г. назад
श्रीमद्भक्तिदयित माधव गोस्वामी महाराज का आविर्भाव उत्थान एकादशी तिथि पर
बांग्लादेश के कंचनपाड़ा गांव में हुआ था।
• महाराज जब चार वर्ष के बालक थे तब आपके पिता परलोक वासी हो गए।
• आपका लालन पोषण आपकी माता जो भक्तिमति और साधुसेवा परायण थीं, के द्वारा हुआ ।
११ वर्ष की आयु तक आपको संपूर्ण भगवत गीता कंठस्थ हो गई थी।
• पूर्व संस्कारों के बिना भक्तिमयी बुद्धि का होना संभव नहीं। आपके जीवन में इस बात का अनेकानेक बार परिचय मिलता है।
• जैसे कि विद्यालय में दौड़ प्रतियोगिता में गिरकर रक्त बहने लगा। अध्यापकों के सांत्वना देने पर कहा, शीघ्र स्वस्थ हो जाऊंगा, भगवान जो करते हैं, वह मंगलकारी होता हैं।
•एक दिन बाल्य बंधु के साथ श्रीचैतन्य महाप्रभु की लीलास्थली श्रीधाम मायापुर दर्शन करने श्रीचैतन्य मठ में पहुँचे।
• वहां अतिमर्त्य महापुरुषोचित श्रीलप्रभुपाद भक्तिसिद्धान्त गोस्वामी ठाकुर के दिव्यदर्शन करके उनके प्रति अत्यन्त आकृष्ट हुए ।
• श्रीलप्रभुपाद ने श्रीविग्रहगण के दर्शन करने की विधि बताई। अधोक्षज वस्तु केवल श्रवण के द्वारा ही जानी जा सकती है, नेत्रों से समझना कठिन है।
• श्रील प्रभुपाद के दर्शन एवं मुखारविंद से कथा श्रवण करने से धीरे धीरे भक्ति जाग्रत होने लगी। 1927 में श्रील प्रभुपाद से दीक्षा ग्रहण करी।
• आपका दीक्षित नाम श्रीपाद हयग्रीव दास ब्रह्मचारी हुआ।
• गुप्त रूप से ठाकुरजी और वैष्णवों की सेवा के लिए बहुत प्रकार के द्रव्यादि मठ में भेजते।
• दीवार पर लगे महाप्रभु के चित्रपट को देख कर आप सुख अनुभव करते हैं।
यह जानकर आपके गुरुभाई ने कहा कि प्रत्येक वस्तु में यह भावना होनी चाहिए कि हम महाप्रभु को सुख प्रदान करे।
• आपने आजीवन इस बात का पालन किया । चित्रपट को दीवार से उतारकर उपयुक्त स्थान पर रखा और सेवा की।
• श्रीमन्महाप्रभु की प्रेमभक्ति वाणी का प्रचार की चेष्टा, उत्साह पूर्वक बहुत प्रकार की सेवा में सदा उद्धत रहना, बहुमुखी योग्यता के द्वारा श्रीलगुरुदेव (प्रभुपाद) के चरण में पूर्णरूप से समर्पित रहना।
इन सेवा प्रवृत्ति से सन्तुष्ट होकर श्रीलप्रभुपाद ने आपको ज्वालामुखी ऊर्जा (Volcanic energy) की उपाधि दी।
• वैष्णवों द्वारा प्रदत्त वस्तु को सदैव सम्मान पूर्वक रखना चाहिए। यह भक्ति है, वैष्णव की कृपा है उनका गुरुत्व है।
कर्मी से दान लेने पर भक्ति इतर कामनाएं जागृत होती है।
कथा : श्रील प्रभुपाद के द्वारा दिए गए स्वेटर का सम्मान करना।
• श्रीलप्रभुपाद के कथन-- "मठ में सारी सेवाएं मेरी है। जिसने जितनी सहायता कर दी उसके प्रति कृतज्ञता अर्पित करो।"
आपने अक्षरशः इसका आचरण किया।
#harikatha #gaudiyavaishnav #iskcon #vrindavan #srilaprabhupada #gaudiyavaishnav #prabhupadparshad #srilaprabhupadparikar #gaudiyavaishnavism #chaitanyamahaprabhu #chaitanyagaudiyamath #madhav_goswami #bhaktidayita #prabhupada #srilaprabhupad