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कार्तिक माहात्म्य अध्याय 16 | मंदिर मार्जन और दीपदान की महिमा | Dhyaan Saar

Dhyaan Saar

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कार्तिक माहात्म्य अध्याय 16 | मंदिर मार्जन और दीपदान की महिमा | Dhyaan Saar

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Dhyaan Saar
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कार्तिक माहात्म्य — अध्याय सोलह। इस अध्याय में नारदजी राजा पृथु को कार्तिक मास में भगवान के मंदिर का मार्जन करने और दीपदान करने की महिमा सुनाते हैं। पहली कथा में राजा जयध्वज अपने पूर्व जन्म की स्मृति बताते हैं। अनजाने में भगवान के मंदिर की सफाई और दीप प्रज्वलित करने के कारण उन्हें पुण्यफल प्राप्त हुआ। इसके बाद नारदजी दूसरे के दीपक को प्रज्वलित करने की महिमा बताते हैं। राजा सुदर्शन और रानी मदनालसा की कथा के माध्यम से समझाया गया है कि भगवान के मंदिर में दीपक को फिर से जलाने का भी विशेष पुण्य बताया गया है। श्रद्धापूर्वक सुनें कार्तिक माहात्म्य का सोलहवाँ अध्याय। ॥ इस प्रकार कार्तिक माहात्म्य का सोलहवाँ अध्याय समाप्त हुआ ॥ कल सुनेंगे — कार्तिक माहात्म्य का सत्रहवाँ अध्याय। राधे-राधे 🙏 #कार्तिकमाहात्म्य #अध्याय16 #दीपदान #मंदिरमार्जन #कार्तिकमास #जयध्वज #मदनालसा #DhyaanSaar