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Weekly Discourse- Seeker of the Truth to Liberation (जिज्ञासु से मुमुक्षु की यात्रा)- Sep 19, 2026.

VihangamYoga USA

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Weekly Discourse- Seeker of the Truth to Liberation (जिज्ञासु से मुमुक्षु की यात्रा)- Sep 19, 2026.

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अध्यात्म जिज्ञासु से मुमुक्षु की यात्रा मंगल कामना एवं प्रस्तावना सर्वप्रथम व्यक्त और अव्यक्त सद्गुरु सत्ता के चरणों में कोटि-कोटि नमन। उपस्थित सभी अध्यात्म-अनुरागी भाइयों और बहनों को सादर जय सद्गुरु देव। इस सत्र के संचालक श्री निरंजन कुमार जी तथा यह सुंदर प्रश्न रखने वाले हँसमुख पटेल जी का हार्दिक धन्यवाद। आज का विषय है—अध्यात्म जिज्ञासु से मुमुक्षु बनने की यात्रा। कभी जीवन में ऐसा प्रश्न उठता है जिसका उत्तर केवल पुस्तकों या बाहरी उपलब्धियों से नहीं मिलता। सब कुछ होते हुए भी मन पूछता है—मैं कौन हूँ? जीवन का उद्देश्य क्या है? मृत्यु के बाद क्या है? जब यह प्रश्न क्षणिक विचार न रहकर जीवन का केंद्र बन जाए, तब आध्यात्मिक यात्रा आरंभ होती है। कठोपनिषद् के नचिकेता की कथा इसी यात्रा का उज्ज्वल उदाहरण है। नचिकेता का प्रश्न ऋषि वाजश्रवस ने यज्ञ किया और दान देने लगे। उनके छोटे पुत्र नचिकेता ने देखा कि दान में ऐसी बूढ़ी गायें दी जा रही हैं जो न चल सकती हैं, न दूध दे सकती हैं। उसके भीतर प्रश्न उठा—यदि दान करना है तो क्या वह ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे किसी का वास्तविक कल्याण हो? वह केवल यह नहीं देख रहा था कि क्या हो रहा है; वह पूछ रहा था कि क्यों हो रहा है। उसने पिता से बार-बार पूछा, “आप मुझे किसे देंगे?” क्रोध में पिता के मुख से निकल गया, “मैं तुम्हें मृत्यु को देता हूँ।” नचिकेता ने इसे केवल कठोर वचन नहीं माना। उसके भीतर और गहरा प्रश्न जागा—मृत्यु कौन है? शरीर के नष्ट होने पर क्या सब समाप्त हो जाता है? यही प्रश्न उसे यमराज के द्वार तक ले गया। सत्य के लिए धैर्य यमराज घर पर नहीं थे। नचिकेता तीन दिन और तीन रात प्रतीक्षा करता रहा। उस बालक की दृढ़ता हमें बताती है कि सच्चा जिज्ञासु प्रश्न को सुविधा के अनुसार नहीं छोड़ता। यमराज लौटे तो अतिथि-सत्कार के रूप में तीन वर देने को कहा। पहले वर में नचिकेता ने अपने पिता का क्रोध शांत होने और उनके प्रेम से स्वीकार करने की कामना की। इससे पता चलता है कि अध्यात्म संसार के कर्तव्यों से विमुख होना नहीं है। दूसरे वर में उसने उस अग्नि-विद्या का ज्ञान माँगा जो मनुष्य को उच्च कल्याण की दिशा देती है। दो वरों के बाद तीसरा वर बचा—और वही कथा का हृदय है। तीसरा वर और परीक्षा नचिकेता ने पूछा, “मनुष्य के मरने के बाद उसके विषय में अलग-अलग मत हैं। कोई कहता है कि कुछ रहता है, कोई कहता है कि नहीं रहता। आप इसका सत्य बताइए।” यह केवल मृत्यु का प्रश्न नहीं था; यह आत्मा और अपने वास्तविक स्वरूप का प्रश्न था। यमराज ने कहा कि यह अत्यंत सूक्ष्म विषय है और इसके बदले दूसरा वर माँग लो। उन्होंने दीर्घायु, धन, वैभव और अनेक भोगों का प्रस्ताव दिया। एक ओर क्षणिक सुख थे, दूसरी ओर सत्य। नचिकेता ने उत्तर दिया कि ये वस्तुएँ टिकने वाली नहीं हैं; शरीर वृद्ध होगा, धन समाप्त होगा और इंद्रिय-सुख क्षीण होंगे। इसलिए उन्होंने कहा—मुझे वही ज्ञान चाहिए जो मृत्यु के रहस्य को खोल दे। ( अधिक जानकारी के लिए इसे पूरा सुने....) --------------------- Physical poses are for the physical fitness, meditative exercise for the peace of mind; However, the meditation with showering experience of consciousness is for the ever lasting inner peace of soul after which the soul is set free from all the sufferings. ---- CONNECT WITH VihangamYoga USA(North America Institute of Vihangam Yoga) : Linkedin :   / north-america-institute-of-vihangam-yoga-inc   Twitter :   / na_vihangamyoga   Instagram :   / northamericavihangamyoga   Facebook:   / donate2vihangamyogausa   Meetup : https://www.meetup.com/vihangam-yoga-... https://www.meetup.com/meditation-of-... Podcast: Spotify : https://open.spotify.com/show/11NjxrZ...) https://open.spotify.com/show/0PzrJed... (English) We are available on Google and Apple podcasts as well. ---- About : Welcome to North America Institute of Vihangam Yoga (NAIVY). NAIVY is an autonomous organization registered in USA. NAIVY established its root in US in the year 2008 and is functional across various states of US since then. Through NAIVY, we try our best to pass on the divine message of Sadgurudeo for the welfare of entire human race. We conduct Yoga and Meditation workshops as well as Satsang (spiritual talk) to unravel the mystery of the science of consciousness. Vihangam Yoga is not only the exercise of the body and mind but it goes a step beyond to deal with the need of the soul. Vihangam Yoga is known for its incredibly powerful meditation technique. This meditation requires only 10 minutes each of regular practice twice a day, to unleash one’s true, untapped potential. Neuroscientists at the Central Institute of Psychiatry, India have discovered that this meditation practice may provide one with high levels of awareness, consciousness and positive energy, coincident with an elevated state of peace and rest.