माण्डूक्य उपनिषद। अथर्ववेदीय माण्डूक्योपनिषद्। सम्पूर्ण अनुवाद। Mandukya Upanishad |
सनातन तत्त्वज्ञान
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माण्डूक्य उपनिषद। अथर्ववेदीय माण्डूक्योपनिषद्। सम्पूर्ण अनुवाद। Mandukya Upanishad |
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सनातन तत्त्वज्ञान
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।। सनातन तत्त्वज्ञान ।।
माण्डूक्य उपनिषद। अथर्ववेदीय माण्डूक्योपनिषद्। सम्पूर्ण अनुवाद। Mandukya Upanishad |
शान्तिपाठ...
भूत, भविष्य, वर्तमान एवं तीनों कालों से अतीत, सब भावों को अकार स्वरूप बताना......
अकार और परब्रह्म परमात्मा की एकता का प्रतिपादन करने के लिए उसके चार चरणों का निरूपण......
परब्रह्म के पहले चरण स्थूल जगत्-रूप वैश्वानर का वर्णन .........
परब्रह्म के दूसरे चरण प्रकाशमय हिरण्यगर्भ रूप तैजस का वर्णन.......
परब्रह्म के तीसरे चरण विज्ञान आनंदमय प्राज्ञ का वर्णन ...........
उक्त तीन पादों द्वारा जिसके स्वरूप का लक्ष्य कराया गया है, उसे सर्वान्तर्यामी, सर्वेश्वर, सर्वज्ञ और सबका कारण बतलाना .........
परब्रह्म के चतुर्थ चरण निर्गुण-निराकार निर्विशेष स्वरूप का वर्णन ......
नामी परब्रह्म परमात्मा की उनके नाम प्रणव की तीन मात्राओं के साथ तीनों पदों की एकता का निरूपण.......
वैश्वानर नामक पहले चरण के साथ पहली मात्रा 'अ'कार की एकता और उसके ज्ञान से सम्पूर्ण भोगों की प्राप्ति का फल...
तैजस नामक दूसरे चरण के साथ दूसरी मात्रा 'उ'कार की एकता और उसके ज्ञान से ज्ञान परम्परा के उत्कर्ष और स्वभाव की प्राप्ति का फल .....
प्राज्ञ नामक तीसरे चरण के साथ तीसरी मात्रा 'म'कार की एकता और उसके ज्ञान से सम्पूर्ण जगत् का ज्ञान तथा सर्वत्र परब्रह्म दृष्टि रूप फल ....
मात्रारहित आकार की परमेश्वर के चौथे चरण - निर्बिशेष रूप के साथ एकता और उसके ज्ञान में
परब्रह्म की प्राप्ति का फल ....
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