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कार्तिक मास का धार्मिक महत्व | अन्नदान से मोक्ष कैसे? | गीता पाठ से नरक मुक्ति |

moti singh Rathore

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कार्तिक मास का धार्मिक महत्व | अन्नदान से मोक्ष कैसे? | गीता पाठ से नरक मुक्ति |

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🚩 कार्तिक मास का धार्मिक महत्त्व - ब्रह्मा-नारद संवाद 🚩 कार्तिक मास महात्म्य के प्रकरण में ब्रह्माजी ने नारद जी से कार्तिक मास की श्रेष्ठता, उसमे करने योग्य स्नान, दान, पूजन आदि धर्मो का माहात्म्य बतलाकर स्नान की विधि एवं कार्तिक व्रत करने वालो के लिए पालनीय नियमो का वर्णन किया है। ब्रह्माजी ने बताया: कार्तिक मास के समान कोई मास नही, सतयुग के समान कोई युग नही, वेदों के समान कोई शास्त्र नही और गंगाजी के समान दूसरा कोई तीर्थ नही तथा इसी प्रकार अन्न दान के समान कोई दूसरा दान नही है। कार्तिक में क्या करें? मनुष्य को कार्तिक मास में शालिग्राम शिला का पूजन और भगवान वासुदेव का ध्यान करना चाहिए। दान का क्रम: सब दानों से बढ़कर कन्यादान है, उससे भी अधिक विद्यादान है, विद्यादान से भी अधिक गोदान का महत्व है, और अन्नदान का भी महत्त्व अधिक है, क्योंकि यह अन्न के आधार पर ही जीवित रहता है इसलिए कार्तिक मास में अन्न दान अवश्य करना चाहिए। पूर्व काल में सत्यकetu नामक ब्राह्मण ने केवल अन्न दान से सब पुण्यों का फल पाकर परम दुर्लभ मोक्ष को प्राप्त किया था। गीता का माहात्म्य: कार्तिके मासि विपेन्द्र यस्तु गीतां पठेन्नर:।_ तस्य पुण्यफलं वक्तुं मम शक्तिं विदधते॥_ गीतामास्तु समं शास्त्रं न भूतं न भविष्यति।_ सर्वपापहरा नित्यं गीतेका मोक्षदायनी॥_ जो मनुष्य कार्तिक मास में नित्य गीता का पाठ करता है उसके पुण्य फल का वर्णन करने की शक्ति मेरे में नही हैं। गीता का एक पाठ करने से मनुष्य घोर नरक से मुक्त हो जाता है। एक मात्र गीता ही सदा सब पापों को हरने वाली तथा मोक्ष देने वाली है। 🙏 ॥जय जय श्री राधे॥ 🙏 #KartikMaas #KartikMahatva #BrahmaNaradSamvad #ShaligramPujan #Annadan #GeetaPath #TulsiPujan #SatyaketuKatha #KartikSnan #RathoreBhinchari