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श्रीमद् भागवत अध्याय 15 के श्लोक 47 से आगे...

Adhyatm

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श्रीमद् भागवत अध्याय 15 के श्लोक 47 से आगे...

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🙏 हरि ॐ! इस वीडियो में हम श्रीमद् भागवत महापुराण, सप्तम स्कंध के पंद्रहवें अध्याय के श्लोक 47 से अंत तक का भावार्थ समझ रहे हैं। यह अध्याय देवर्षि नारद जी द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को दिया गया जीवन-उपदेश है। 🌷 इस वीडियो में आप जानेंगे: • वैदिक कर्म के दो प्रकार: प्रवृत्त कर्म और निवृत्त कर्म • प्रवृत्ति मार्ग में जीव का बार-बार संसार में लौटना, और निवृत्ति मार्ग से अमृतत्व की प्राप्ति • आसक्ति का त्याग, मन पर संयम और भगवान में चित्त की स्थिरता • नारद जी द्वारा अपने पूर्व जन्म का वर्णन और संत-सेवा का फल • पांडवों का सौभाग्य: परब्रह्म श्रीकृष्ण का उनके घर में मित्र और संबंधी रूप में रहना • अध्याय का समापन और भक्ति का सार 🌹 संदेश: कर्म करते हुए भी उसमें बंधना नहीं है। निवृत्ति और भगवद्भक्ति ही जीवन को परम शांति तक ले जाती है। 🌷स्वाध्याय संवर्धन के लिए कृपया चैनल को सब्सक्राइब करें और घंटी का बटन दबाएँ, ताकि भागवत की हर कथा आप तक पहुँचे। #श्रीमद्भागवत #भागवतपुराण #सप्तमस्कंध #नारदयुधिष्ठिरसंवाद #सनातनधर्म #भागवतकथा #हरिनाम🙏🏻