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Nandai Bedikha l||नंदा राजजात Garhwali Song ||Jagmohan Singh Rawat "Jagmora" Nanda Rajjat Song 26-27

Jagmora Garhwali Puzzles song

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Nandai Bedikha l||नंदा राजजात Garhwali Song ||Jagmohan Singh Rawat "Jagmora" Nanda Rajjat Song 26-27

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New Garhwali Song Song : "Nandai Bedikhal Snkalan : Nanda Rajjat Song 2026-27 Lyrics : Jagmohan Singh Rawat "Jagmora" Nanda Raj Jat Song 2026, Music+Voice+Video AI Arrangement : Pradeep Rawat “Khuded” Lyrics सूंणा मेरा बाबा जी नंदा ला बेद नी जाणा सूंणा मेरा बरमा जी नंदा ला बेदनी जाणा ऐजा घुंडा मेरा मुंडा ऐजा रुपा मेरा कुंडा सूंणा मेरा स्वामी जी नंदा ला रूपकुंड जाणा भिंटोळी बोकीक द्योसिंग तिसळा ह्वे जाला चौसिंग सूंणा बाटूं अगवानी जौंल मंग्री तीस बुझाणा डौल्येर बोकीक डोली लिजाला धर्म भै छंतोळी सूंणा लाटू धर्म भैजी डौलिया धार थौ खाणा बल हाथी निर्दुद्धो होंदू अर राजा प्रबुद्धो होंदू हाथी घोड़ा लट्ठीधार न राजा पातर नचौण्या मांगल लगाला मंगलेर ढौल पुरयाळा ढौल्येर सूंणा दीसा धियाणियों कैलुवा विनायक गाणा म्यार खोली का गणेशा म्यार मोरी का नरैणा तुम दैंणा सैंणा होणो नंदा बगुवाबासा आणा ब्रह्माकू यन क्वी बेद नी जु लिखे नि ग्याई बेदनी लगांदु बैतर्णी पार छौं नंदै बेदीखाल मि क्यछौं? शब्दार्थ/भावार्थ सूंणा (सूनो) मेरे बाबा जी, नंदा ला (ने) बेद (चार वेद) नि जाणा (नहीं जाने/पढ़े), सुनो मेरे ब्रह्मा जी, नंदा ला (ने) बेदनी (नंदा कैलाश जात के एक मुख्य रात्रि पड़ाव में, जहां ब्रह्माजी ने चार वेदों के रचना की थी) जाना। कहावत अनुसार आ जा घुंडा (घुटने) मेरे मुंडा (सिर), यानी आ बैल मुझे मार, यानी जानबूझकर कैलाश यात्रा के दुष्कर निर्जन पड़ाव में जाकर मुसीबत मोल लेना, आजा रुपा (पार्वती स्वरूपा रूपवती नंदा) मेरे कुंडा (कुंड), यानी रूपकुंड, तो सुनो मेरे (नंदा) के स्वामी जी (कैलाशपति शिवजी), नंदा ला (ने) रूपकुंड जाना‌। भिंटोळी (मायके से मिले भेंट उपहार की सौगात) बोकीक (ढोकर) द्योसिंग (तातड़ा के द्योसिंह, लाटू देवता के साथ नंदा जात की अगुवाई करने वाले धर्मभाई/वीर सेवक), तिसळा (प्यासे) ह्वे जाला (हो जायेंगे) चौसिंग (चौसिंगा खाडू, नंदा का देवरथ)। तो सुनो बाटूं (रास्ते) के अगवानी (अगुवाई), जौंल मंग्री (नंदा जात के एक मुख्य रात्रि पड़ाव, गैरोली पातल के सानिध्य में बसे पगनी, जो ग्रामीण द्वारा जौंल मंगरी को चुराकर गांव लाने के कारण गांव 'च्वरपगनी' हुआ) तीस (प्यास) बुझाना। डौल्येर (डोली के कहार) बोकीक (उठाकर) नंदा की डोली, ले जायेंगे धर्म भाई (लाटू देवता/द्योसिंग देवता) छंतोळी (देवछतरी), तो सुनो लाटू धर्म भैजी (भाई), डौलिया धार (गैरोली पातल से आगे नंदा जात का एक मुख्य दिन के पड़ाव) थौ खाणा (आराम करना)। कहावत अनुसार बल हाथी निर्दुद्धो (बगैर दूध) का होता है, और राजा प्रबुद्धो (पराई यानी वजीर के दिमाग से चलने वाला) होता है, तो, हाथी घोड़ा लट्ठीधार (बेदनी बुग्याल से आगे के एक मुख्य दिन के पड़ाव), नहीं राजा पातर नचौण्या (नंदा जात के आगे के दिन के मुख्य पड़ाव)। मान्यता है कि कन्नौज के‌ राजा जशधवल यहां पर नृतकियों के नाच गाने के मनोरंजन में नैसर्गिक शांति की अवहेलना कर रहा था, तो नंदा क्रोधित हो गई, फलस्वरूप नृतकियां शापित होकर पत्थर बन गई। तब से यहां गाजे बाजे नाच गाना और औरतों के आने पर प्रतिबंध है, हालांकि समयानुसार इसमें थोड़ी बहुत यथोचित ढील दी जा रही है। मांगल (मांगलिक गीत) लगायेंगे मंगलेर (मांगल लगाने वाले), ढौल (सुर पे सुर) पुरयाळा (पूरा कर रहे हैं) ढौल्येर (सुर की जुगलबंदी में साथ निभाने वाले), सुनो दीसा धियाणियों (विवाहिता बेटियां), आगे के पड़ाव गणेश जी को समर्पित कैलुवा विनायक (मंदिर) गाना। मेरी (नंदा) की खोली के गणेश, मेरे (नंदा) के मोरी के नरैणा (नारायण), तुम दैंणा (दाहिने यानी कृपालु) सैंणा (समतल बुग्याल) होने, नंदा जात के अगले पड़ाव बगुवाबासा (यहां पर नंदा देवी ने‌ अपनी सवारी बाघ/शेर को बासा यानी ठहरने को कहा) आना। अंत में अमुक पहेलीनुमा प्रश्नात्मक शैली में कहती और पूछती है कि बल‌ ब्रह्मा जी के ऐसे कोई वेद नी (नहीं), जो लिखे नहीं गये बेदनी, लगाती बैतर्णी (भवसागर) पार है, तो बताओ कि तथाकथित नंदा (नंदाजात) की बेदीखाल (वेद शास्त्रियों के आने जाने के पड़ाव) की बल वह क्या है?