Перейти к содержимому

सकनोली थैर्थान Mundneswar बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1241 Jagmohan Singh Rawat Jagmora

Jagmora Garhwali Puzzles song

0:00 / 0:00

सकनोली थैर्थान Mundneswar बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1241 Jagmohan Singh Rawat Jagmora

2 603 просмотра · 3 месяца назад
Jagmora Garhwali Puzzles song
898 подписчиков
2 603 просмотра · 3 месяца назад
सकनोली थैर्थान Mundneswar बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1241 Jagmohan Singh Rawat Jagmora lyrics: मुंडनेश्वर खैरा माली पुजि औला झालीमाली मुंडन डांडा खैरा डाली पुजि औला थैरा माली त्यार खैकर्यूंन् खैरि खाइ त्यार ढाकर्यूंन् खैरि खाइ तब जैकी खैरै डाली खैरालिंग जन हैरि ह्वाइ बल तेरा ढकरी आला लूंणा ढाकर बोकि लाला अर तेरा जगरी आला थैरा जागर गैकि आला जु नगरा असवाल आला वु अधा गढ़वाल बसाला थैरा थैरवाल आला वु खैरा डाळा लगाला जु तेरा खैकरी आला वु त्वेमा खैरी लगाला जु तेरा खर्कवाल आला नैली नैनवाल थर्पाला जु सरासू का सरस आला किनगोड़ी का गणी आला झालीमाली गीत गाला मुंडनेश्वर मा मुंड नवाला ठकुरैणि सिमान्या ठकुरों मुंडन डांडा मुंडा ढिबरों सरी ढिबरी मूंडि मांडी पुछै दौं लरट करट ढांडी हजार ग्राम हजार धाम हमर भाषा हमर पछांण जगमोरा पजल धाम छौं सकनोली थैर्थान क्य छौं? शब्दार्थ/भावार्थ पजल हजारिका जगमोहन सिंह रावत 'जगमोरा' के संदेश हजार ग्राम हजार धाम हमरी भाषा हमरी पछ्याण के संकल्प के साथ पजल यात्रियों की 4-6 जून, 2026 के दौरान की जाने वाली झालीमाली- मुंडनेश्वर के असवालस्यूं पट्टी कल्जीखाल क्षेत्र विशेष की 16 धाम पजल यात्रा संदर्भित पजल के अनुसार‌ अमुक कहता है कि- बल मुंडनेश्वर (पौड़ी कल्जीखाल विकास खंड की असवालस्यूं पट्टी के गांव थैर के मुंडन डांडा में स्थापित महादेव के देवस्थान) खैर के माली (खैर यानी कत्था के पेड़ों के माली/खैरालिंग के पश्वा/डांगर), पूजकर आयेंगे झालीमाली (मुंडनेश्वर/खैरालिंग के आसपास के क्षेत्र में स्थापित देवी के थान), मुंडन डांडा के खैर (कत्थे) के डाली (पेड़), जिनमें खैरालिंग महादेव का निवास माना जाता है, पूजकर आयेंगे थैर गांव के माली (पश्वा/ डांगर, जिनपर देवता अवतरित होते हैं)। तेरे (अमुक के) खैकर्यूंन् (खैकरों यानी खेतिहर हलधरों) ने खैरि (कष्ट) खाये, तेरे (अमुक के) ढाकर्यूंन् (ढाकरियों यानी पैदल विसातखाने का बोझा लाने वाले व्यापारियों) ने खैरि (कष्ट) खाये, तब जाकर खैर की/के डाली (पेड़), खैरालिंग जैसे हैरि (हरे यानी हरिमयी) हुये। बल तेरे (अमुक के) ढकरी आयेंगे, लूंणा (नमक) के ढाकर (विसातखाने का बोझा) बोकि (उठाकर) लायेंगे, और तेरे (अमुक के) जगरी (जागर लगाने वाले धामी) आयेंगे, थैरालिंग (खैरालिंग/मुंडनेश्वर महादेव) के जागर गाकर आयेंगे। जो असवालस्यूं पट्टी के असवालों के मुख्य गांव नगर के असवाल आयेंगे, वह आधा गढ़वाल आधा असवाल कहावत के अनुसार आधा गढ़वाल बसायेंगे, थैर गांव के थैरवाल आयेंगे, वह खैर के डाळा (पेड़) लगायेंगे। जो तेरे (अमुक के) खैकरी (खेतिहर किसान) आयेंगे, वह त्वेमा (तुझमें यानी अमुक में) खैरी (कष्ट विपदा) लगायेंगे, जो तेरे खर्कवाल आयेंगे, नैली गांव के नैनवाल थर्पाला (स्थापित करेंगे)। जो सरासू के सरस (कुसुम जगमोरा पजल ऋषि सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चंद्र घिल्डियाल 'सरस') आयेंगे, किनगोड़ी गांव के गणी (गणेश खुगशाल 'गणी', निदेशक, लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र, गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, धाद मासिक पत्रिका के संस्थापक एवं कुसुम जगमोरा पजल ऋषि सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार) आयेंगे, झालीमाली देवी के गीत गायेंगे, मुंडनेश्वर महादेव में मुंड नवाला (शीश नवायेंगे)। ठकुरैणि (ठकुराइन) सिमान्या (सादर नमन) ठकुरों (ठाकुरों), मुंडन डांडा मुंडा ढिबरों (भेड़ों की ऊन निकालो), तो बल सारी ढिबरी (भेड़) मूंडि मांडी (की ऊन निकाली), लेकिन पुछै दौं (पूंछ के बाल निकालते वक्त) लरट करट (भेड़ का रोना-धोना) ढांडी (नाटक करना हुआ), यानी पूरा हाथी निकल गया सुई निकलनी बाकी रह गई, यानी मुंडनेश्वर महादेव की मुख्य पूजा अर्चना हो गई, बस मुंडेन यानी छुटपुट कार्य रह गये। अंत में अमुक पहेलीनुमा प्रश्नात्मक शैली में कहता और पूछता है कि बल हजार ग्राम हजार धाम (पजल हजारिका पजल सम्राट जगमोहन सिंह रावत 'जगमोरा' के संदेशात्मक संकल्प के अनुसार), हमारी भाषा हमारी पहचान, तो बताओ कि तथाकथित सकनोली (गांव के सकनोली ब्राह्मण, जो अमुक धाम के पुजारी हैं) के थैर्थान (थैर गांव का देवस्थान) बल वह क्या है?