🚩श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 67–68 | इंद्रियों पर संयम और स्थिर बुद्धि का रहस्य | गीता अमृतवाणी
Shradha Sanskar
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🚩श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 67–68 | इंद्रियों पर संयम और स्थिर बुद्धि का रहस्य | गीता अमृतवाणी
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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 के श्लोक 67–68 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि मन जब इंद्रियों के पीछे चला जाता है, तो मनुष्य की बुद्धि विचलित हो जाती है।
जो साधक अपनी इंद्रियों को संयम में रखकर विषयों से आसक्ति को नियंत्रित करता है, उसकी बुद्धि स्थिर होती है।
श्लोक 67–68 का सरल भावार्थ:
मन को इंद्रियों के वश में नहीं होने देना चाहिए। जो व्यक्ति इंद्रियों को संयमित रखता है और विषयों में आसक्ति नहीं रखता, वही स्थिर बुद्धि को प्राप्त कर सकता है।
🙏 श्रीकृष्ण के दिव्य ज्ञान को समझने के लिए वीडियो को अंत तक सुनें।
जय श्रीकृष्ण 🙏 | हरि ॐ 🙏