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ईशावास्य उपनिषद भाग 3 | Isha Upanishad in Hindi | Sakshi Poshattiwar

Sakshi Poshattiwar

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ईशावास्य उपनिषद भाग 3 | Isha Upanishad in Hindi | Sakshi Poshattiwar

151 просмотр · 8 дн. назад
Sakshi Poshattiwar
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🌸 इस वीडियो में जानिए: परम सत्य स्थिर होकर भी मन से तेज कैसे है? वह दूर भी है और निकट भी — इसका वास्तविक अर्थ क्या है? परम सत्य सबके भीतर और बाहर कैसे व्याप्त है? विद्या और अविद्या का पारंपरिक आध्यात्मिक अर्थ क्या है? क्या केवल विद्या या केवल अविद्या पर्याप्त है? विद्या और अविद्या के परिणाम अलग क्यों बताए गए हैं? ईशावास्य उपनिषद के ग्यारहवें मंत्र में अमृतत्व का क्या रहस्य है? इन शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन से कैसे जोड़ सकते हैं? ईशावास्य उपनिषद, ईशावास्य उपनिषद भाग 4, Isha Upanishad, Isha Upanishad in Hindi, Ishavasya Upanishad, Isha Upanishad Episode 4, परम सत्य का रहस्य, वह दूर भी है और निकट भी, विद्या और अविद्या, Vidya and Avidya, ईशावास्य उपनिषद मंत्र 4, ईशावास्य उपनिषद मंत्र 5, ईशावास्य उपनिषद मंत्र 11, आत्मज्ञान, कर्म और उपासना, अमृतत्व का रहस्य, Upanishads in Hindi, Vedanta in Hindi, Sanatan Dharma, Sakshi Poshattiwar