मरीचि के जीवन में ऐसा क्या हुआ कि बदल गई आत्मा की दिशा?
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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भाग - 3
सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा में भगवान महावीर के जीवन-चरित्र और पूर्वभवों के प्रसंगों को समझना आत्मा की दिशा और कर्मों की गति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
आज के प्रवचन में मरीचि के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आता है—कैसे उनके जीवन में वैराग्य का भाव जागा, संयम की ओर कदम बढ़ा, फिर परिस्थितियों और विचारों के परिवर्तन ने उनके जीवन की दिशा को किस प्रकार प्रभावित किया और आगे के भवों की यात्रा कैसे बनी।
मरीचि के विषय में जैन परंपरा में वर्णित भविष्य की महत्त्वपूर्ण अवस्थाएँ—वासुदेव, चक्रवर्ती और तीर्थंकर—इस कथा को और भी विशेष बनाती हैं।
प्रवचन में यह भी जानिए कि भरत चक्रवर्ती ने मरीचि से मुँह क्यों मोड़ा और फिर उन्हें प्रणाम क्यों किया?
मरीचि के जीवन में ऐसा क्या परिवर्तन आया जिसने उनकी आत्मा की आगे की यात्रा को प्रभावित किया?
इन सभी प्रश्नों के माध्यम से यह प्रवचन सम्यक्त्व से सिद्धत्व तक आत्मा की यात्रा को समझने का अवसर देता है।
प्रवचिका:
उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी श्रमणी सूर्या
डॉ. श्री सरिता जी म. सा.
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