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साधना की असली परीक्षा! परिषह विजय और भगवान महावीर पर उपसर्ग | भाग–14

Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj

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साधना की असली परीक्षा! परिषह विजय और भगवान महावीर पर उपसर्ग | भाग–14

60 просмотров · 5 дн. назад
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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🌸 श्री महावीराय नमः 🌸 📿 श्री उत्तराध्ययन सूत्र — द्वितीय दिवस ✨ द्वितीय अध्ययन : परिषह प्रविभक्ति 🙏 सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा — भगवान महावीर की दीक्षा के पश्चात की घटनाएँ आज के प्रवचन में श्री उत्तराध्ययन सूत्र के द्वितीय अध्ययन परिषह प्रविभक्ति की अर्थवाणी का वाचन हुआ। इसमें साधु जीवन में आने वाले विभिन्न परिषहों, उनके अर्थ एवं प्रयोजन तथा परिषहों पर विजय प्राप्त करने की आध्यात्मिक दृष्टि को विस्तार से समझाया गया। 🔸 साधु को कौन-कौन से परिषह आते हैं? 🔸 एक समय में कितने परिषह उपस्थित हो सकते हैं? 🔸 परिषहों का वास्तविक अर्थ और प्रयोजन क्या है? 🔸 अनुकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में साधक को कैसा विवेक रखना चाहिए? 🔸 परिषह आने पर साधु को किस प्रकार संयम, धैर्य और समभाव बनाए रखना चाहिए? प्रवचन में यह समझाया गया कि साधना के मार्ग पर परिस्थितियाँ कैसी भी हों, साधक का लक्ष्य आत्मकल्याण और संयम की रक्षा होना चाहिए। सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा — भगवान महावीर की कथा - 14 प्रवचन के दूसरे भाग में भगवान महावीर की दीक्षा के पश्चात घटित घटनाओं, उनके जीवन में आए उपसर्गों तथा उन परिस्थितियों में घटित प्रसंगों का वर्णन किया गया। भगवान महावीर की साधना, सहनशीलता और आध्यात्मिक दृढ़ता से जुड़े इन प्रसंगों के माध्यम से आत्मबल एवं समभाव की प्रेरणा प्राप्त होती है। 🌼 दोनों प्रसंगों का मूल संदेश: परिषह हों या उपसर्ग, साधक को विवेक, धैर्य, संयम और आत्मजागृति के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। 🙏 प्रवचन को अंत तक सुनें और आत्मचिंतन की इस यात्रा में सहभागी बनें। 🔔 ऐसे ही ज्ञानवर्धक जैन आगम प्रवचनों के लिए चैनल को Subscribe करें और वीडियो को साधर्मिक बंधुओं के साथ Share करें। #उत्तराध्ययनसूत्र #परिषहविजय #भगवानमहावीर #सम्यक्त्वसेसिद्धत्वकीयात्रा #जैनधर्म #जैनआगम #जैनप्रवचन #साधनाऔरसंयम