Перейти к содержимому

ऐ ज़िंदगी ज़रा धीरे चल: खोए हुए सुकून की एक भावुक नज़्म

Moner Dastaan

0:00 / 0:00

ऐ ज़िंदगी ज़रा धीरे चल: खोए हुए सुकून की एक भावुक नज़्म

3 674 просмотра · 13 дн. назад
Moner Dastaan
539 подписчиков
3 674 просмотра · 13 дн. назад
ऐ ज़िंदगी ज़रा धीरे चल, कुछ छूट गया है मुझे ढूँढने दे—क्या आप भी भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपना सुकून खो चुके हैं? इस भावुक नज़्म के साथ उन खोए हुए लम्हों और बीते कल की यादों में वापस लौटें। महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह जी की यादों और उनकी अमर संगीत विरासत को समर्पित यह मौलिक ग़ज़ल बीते कल, खोए हुए लम्हों और अधूरे एहसासों की एक भावुक दास्तान है। “Moner Dastaan” की यह मौलिक रचना उन अधूरे एहसासों को आवाज़ देती है जो ज़िंदगी की रफ़्तार में पीछे छूट गए हैं। यह दिल छू लेने वाली नज़्म उन लोगों के लिए है जो एकांत और सुकून की तलाश में हैं और पुरानी डायरी के पन्नों में अपने बचपन की यादें ढूँढ रहे हैं। ⏱ Chapters 0:00 आलाप एवं संगीत परिचय 0:26 ऐ ज़िंदगी ज़रा धीरे चल (मुखड़ा) 0:46 अब वो शहर नहीं, वो ठिकाने नहीं (अंतरा 1) 1:20 कुछ छूट गया है, मुझे ढूँढने दे 2:03 उंगलियों पर गिन रहे हैं अब हम दिन-रात (अंतरा 2) 3:02 जो वक्त के हाथों कहीं खो गया 3:38 शौक की चादर ओढ़कर कहाँ निकल आए (अंतरा 3) 4:34 खाली कमरों में आवाज़ गूंजती है 5:11 धूल जमी है पुरानी डायरी के पन्नों पर (शायरी) 5:56 मैं थक गया हूँ इस दुनिया की दौड़ में (समापन) इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आपका क्या पीछे छूट गया है, हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। ऐसी ही रूहानी प्रस्तुतियों और सुकून भरी शायरी के लिए Moner Dastaan को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं। Disclaimer: यह एक मौलिक रचना है, जगजीत सिंह जी को समर्पित; यह उनका मूल गीत या उनकी आवाज़ में रिकॉर्डिंग नहीं है। #ऐ_ज़िंदगी_ज़रा_धीरे_चल #MonerDastaan #दिल_को_छूने_वाली_नज़्म #ज़िंदगी_शायरी #सुकून_भरी_शायरी