Перейти к содержимому

20 किताबों में छिपा गुरुदेव के पूरे जीवन का सार! | विचार-क्रांति का महामंत्र ‪@yug_sahitya‬

Yug Sahitya

0:00 / 0:00

20 किताबों में छिपा गुरुदेव के पूरे जीवन का सार! | विचार-क्रांति का महामंत्र ‪@yug_sahitya‬

2 365 просмотров · 4 дня назад
Yug Sahitya
6,16 тыс. подписчиков
2 365 просмотров · 4 дня назад
ये पल ही नहीं, स्वर भी क्रांति के हैं! 13 जनवरी 1990 की वह ऐतिहासिक वेला, जब परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा ने इक्कीसवीं सदी के उज्ज्वल भविष्य और आने वाली विचार-क्रांति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी उज्ज्वल भविष्य लेकर आ रही है और इसके लिए मनुष्य का उत्साह ठंडा नहीं पड़ना चाहिए। शांतिकुंज को उन्होंने क्रांति के केंद्र के रूप में देखा और बताया कि आने वाले समय में दैवी शक्तियाँ भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाने तथा उसे पुनः जगद्गुरु बनाने की दिशा में कार्य करेंगी। इसी चिंतन की पृष्ठभूमि में गुरुदेव ने क्रांतिधर्मी साहित्य की रचना की। लगभग 3000 पुस्तकों के विशाल साहित्य में से उन्होंने 20 पुस्तकों को अपने जीवनभर के चिंतन का सार बताया। इन पुस्तकों में विचार-क्रांति, प्रतिभा-परिष्कार, सतयुग की वापसी, जीवन-साधना, भाव-संवेदना, नारी जागरण, शिक्षा एवं विद्या, गायत्री साधना, समयदान और युगधर्म जैसे विषयों पर मार्गदर्शन मिलता है। इस वीडियो में जानिए— 🔸 गुरुदेव ने इक्कीसवीं सदी के बारे में क्या कहा था? 🔸 क्रांतिधर्मी साहित्य को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया? 🔸 विचार-क्रांति से समाज में परिवर्तन कैसे आ सकता है? 🔸 प्रतिभा-परिष्कार को उज्ज्वल भविष्य का आधार क्यों बताया गया? 🔸 भाव-संवेदना को सतयुग की वापसी से क्यों जोड़ा गया? 🔸 “समयदान ही युगधर्म” का वास्तविक संदेश क्या है? 🔸 शांतिकुंज को महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में क्यों बताया गया? 📖 स्रोत: अखण्ड ज्योति, ‘युगवसंत अंक’, फरवरी 2011 यदि आपको परमपूज्य गुरुदेव का साहित्य, गायत्री साधना, युग निर्माण और विचार-क्रांति से जुड़े विषय पसंद हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें। विचार बदलेंगे → चरित्र बदलेगा → समाज बदलेगा → युग बदलेगा। #आचार्यश्रीरामशर्मा #गुरुदेव #विचारक्रांति #क्रांतिधर्मीसाहित्य #अखण्डज्योति #गायत्रीपरिवार #युगनिर्माण #शांतिकुंज #इक्कीसवींसदी #उज्ज्वलभविष्य