पिप्पलादकृतं शिवस्तोत्रम् | ब्रह्मपुराण अध्याय 110 | करुणामय महादेव स्तुति | Om Namah Shivaya
Stotravali
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पिप्पलादकृतं शिवस्तोत्रम् | ब्रह्मपुराण अध्याय 110 | करुणामय महादेव स्तुति | Om Namah Shivaya
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🙏 ॐ नमः शिवाय 🔱
प्रस्तुत है पिप्पलादकृतं शिवस्तोत्रम्, महर्षि पिप्पलाद द्वारा भगवान शिव की अत्यंत भावपूर्ण और दार्शनिक स्तुति।
यह स्तोत्र ब्रह्मपुराण, अध्याय 110, श्लोक 100–106 में प्राप्त होता है। इसमें भगवान शिव को आदिदेव, सर्वसाक्षी, अन्तर्यामी, सर्वेश्वर, स्मरारि, महेश्वर और करुणामय शम्भु के रूप में प्रणाम किया गया है।
स्तोत्र के आरम्भ में महर्षि पिप्पलाद उन धीर साधकों का उल्लेख करते हैं जो संसारिक कर्मों और इच्छाओं का त्याग कर मुक्ति की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की शरण ग्रहण करते हैं। वे भगवान शम्भु को उस परम आश्रय के रूप में स्मरण करते हैं जिनकी शरण साधक को आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाती है।
इसके बाद भगवान शिव को समस्त जीवों के भीतर स्थित अन्तरात्मा और सबके कर्मों तथा भावों के साक्षी के रूप में स्मरण करते हुए उनसे करुणा की प्रार्थना की गई है—
“स मे स्मरारिः करुणां करोतु”
अर्थात — कामदेव के शत्रु भगवान शिव मुझ पर अपनी करुणा करें।
आगे के श्लोकों में भगवान शिव की विभिन्न पौराणिक लीलाओं और उनके करुणामय स्वरूप का वर्णन मिलता है। इसमें रावण से जुड़े प्रसंग, भक्तों पर शिव की कृपा, बाणासुर की शिवभक्ति, कार्तिकेय और गणेश से जुड़ी कथाएँ तथा अंत में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की ओर संकेत मिलता है।
इस स्तोत्र का मुख्य भाव है कि भगवान शिव केवल संहार के देव नहीं, बल्कि भक्तों के रक्षक, करुणामय गुरु, अन्तर्यामी, मोक्षदाता और समस्त सृष्टि के परम आश्रय हैं।
📖 ग्रन्थ-स्रोत: ब्रह्मपुराण
📜 अध्याय: 110
🕉️ श्लोक: 100–106
🙏 स्तुति: महर्षि पिप्पलाद द्वारा भगवान शिव की स्तुति
इस वीडियो में स्तोत्र को शांत, मधुर और भक्तिपूर्ण संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया है, ताकि श्रोता केवल श्लोकों का पाठ ही नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपे शरणागति, करुणा और शिवभक्ति के भाव को भी अनुभव कर सकें।
प्रणमामि शम्भुम्।
करुणां करोतु महेश्वरः।
हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय! 🔱
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