पुरानी कैसेट: Sir Syed Day 2010 | Mushaira में वसी शाह - तुम मेरी पहली मोहब्बत तो नहीं हो
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पुरानी कैसेट: Sir Syed Day 2010 | Mushaira में वसी शाह - तुम मेरी पहली मोहब्बत तो नहीं हो
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पुरानी कैसेट सीरीज़ की एक बेहद दिलकश रिकॉर्डिंग — Annual Sir Syed Day Mushaira 2010 (USA), जो Aligarh Alumni Association, Washington DC ने आयोजित किया था। इस मुशायरे में लाहौर से आए मशहूर शायर वसी शाह (Wasi Shah) ने अपनी मोहब्बत भरी शायरी से पूरी महफ़िल को दीवाना बना दिया।
वसी शाह का वो शेर, जो आज भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा शेयर किया जाता है:
तुम मेरी पहली मोहब्बत तो नहीं हो लेकिन,
मैंने चाहा है तुम्हें पहली मोहब्बत की तरह।
इस मुशायरे में वसी शाह ने अपनी मां के नाम एक बेहद भावुक नज़्म भी पढ़ी:
ये कामयाबियां, इज्ज़त ये नाम तुमसे है,
खुदा ने जो भी दिया है, मक़ाम तुमसे है।
और उनकी सबसे मशहूर नज़्म "मोहब्बत आखिर है क्या, इबादत आखिर है क्या", जिसमें उन्होंने मोहब्बत को छोटी-छोटी इंसानियत भरी बातों से जोड़ा — किसी प्यासे को पानी पिलाना, किसी रोते हुए को दिलासा देना। इसके अलावा उन्होंने अपनी मशहूर नज़्म "कंगन" भी पेश की, जिसने पूरी महफ़िल को भावुक कर दिया।
वसी शाह न सिर्फ एक शायर हैं, बल्कि ड्रामा निगार, एक्टर और टीवी होस्ट भी हैं — पाकिस्तान के सबसे मशहूर समकालीन शायरों में से एक। अगर आपको पुराने ज़माने के असली Mushaira, Urdu Shayari और Najm पसंद हैं, तो ये वीडियो पूरा ज़रूर देखिए। पुरानी कैसेट की तरह, ये शायरी आज भी उतनी ही खास है।
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OPP STATE BANK, AMINABAD, LUCKNOW U.P
PH 9839128165, 9335918233
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