दुख का स्वरूप एवं कारण : 02
use.udaipur и Samyak Life
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दुख का स्वरूप एवं कारण : 02
44 просмотра · 2 недели назад
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इस क्लास में चर्चा किए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. सुखी होने के मार्ग पर चलने के बावजूद हम सुखी क्यों नहीं हो पा रहे हैं, इस पर विचार किया गया (0:27-0:34)।
2. किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए सही प्रक्रिया और सही सामग्री दोनों का होना अनिवार्य है (0:57-1:16)।
3. सांसारिक सुख की तलाश अक्सर अस्थायी होती है, जिसे हम 'स्विचिंग' विधि कहते हैं (4:00-4:46)।
4. भूख लगना या शारीरिक कष्ट दूर करना वास्तविक सुख नहीं, बल्कि केवल दुख को कम करने का प्रयास है (4:53-6:55)।
5. हमारे जीवन की विभिन्न समस्याएं (घर, स्वास्थ्य, धन) वास्तव में हमारी इच्छाओं और अपेक्षाओं से उत्पन्न होती हैं (10:34-10:55)।
6. जब हम किसी चीज की इच्छा करते हैं, तो इच्छा के जन्म लेते ही दुख की शुरुआत हो जाती है (25:03-25:46)।
7. इच्छा को पूरा करना या दबाना दोनों ही समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हैं, क्योंकि इनसे नए दुख पैदा होते हैं (33:44-34:57)।
8. वास्तविक सुख 'निराकुलता' में है और इच्छाओं का निरोध करना ही इस समस्या का मुख्य समाधान माना गया है (6:55-7:17, 36:27-36:45)।
@usespiritual
USE — Universe of Spiritual Enlightenment DHCB Foundation की एक पहल है।
प्रायोजक: श्री निहालचंद जी कासलीवाल, मुंबई
U S E (Universe of Spiritual Enlightenment) एक आधुनिक, शोध-आधारित Life Education Organisation है, जो वीतरागी सर्वज्ञ देव की वाणी पर आधारित आत्मविज्ञान एवं सार्वभौमिक, शाश्वत सिद्धांतों को सरल, तार्किक, व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी रूप में प्रस्तुत करता है।
इसका उद्देश्य व्यक्ति की चिंतन-पद्धति एवं जीवन-दृष्टि को विकसित कर उसे सुख, शांति, सहजता एवं संतुलित जीवन की दिशा में आगे बढ़ाना है।
USE में शिक्षण के दौरान विशेष रूप से:
संवाद • प्रश्न • चिंतन • उदाहरण • जीवनोपयोगी प्रयोग
के माध्यम से विषय को समझने पर ध्यान दिया जाता है।
USE के कार्य में 12 वर्षों का शोध एवं प्रशिक्षण, शोध-आधारित अध्ययन सामग्री तथा प्रशिक्षित एवं मूल्यांकित विद्वानों द्वारा जीवनोपयोगी शिक्षण प्रमुख आधार हैं।
USE-CAP (Center for Applied Philosophy) USE की प्रमुख योजना है।
USE : Transforming Minds, Creating Peace.