किस्सा-कारक-सांवलदेह-दोचस्मी-2/रचयिता-श्री रामरतनगायक/Raja Kark Sharndeh 2 Duet Sonotone-KPS-MS-1992
Satyaveer Kundu
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किस्सा-कारक-सांवलदेह-दोचस्मी-2/रचयिता-श्री रामरतनगायक/Raja Kark Sharndeh 2 Duet Sonotone-KPS-MS-1992
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किस्सा-कारक-सांवलदेह-दोचस्मी-2
रचयिता-श्री रामरतन
गायक-कर्मपाल शर्मा और मंजु शर्मा व साथी
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1. सांवलदेह कर हुक्म लाडली तनै बता कित पहुंचावै।
डोला ठाए कहार चलो जित राम मेरा ले जावै।।
2. डाभ फाड कै झूल बणा ली, गेर पालना लाश लोटा ली,
सांवल बियाबान मैं आली, बैठ गई जड़ मैं।।
3. किसी लाश लिए बैठी तू कौण सै रोवण आली।
के बूझोगे सन्त गात मैं लागी चोट कुढाली।।
4. रोवण आली कौन बता तू किसका मुर्दा ले रही।
मैं दुखिया जंगल में बाबा राह तकूं सूं तेरी।।
5. क्यूं राही गात नै मोस होश कर नाहक जिन्दगी खोवै।
हो नाहक जिन्दगी खोवै।।
6. बैठा हो ले पिया भतेरे सो लिए पिया ।
तेरी खड़ी जगावै नार तू मुख तै बोलिया पिया।।
7. वार्ता
8. दिवानी हुई दिवानी को ना जर चाहिए, ना घर चाहिए
इस दिल ने पुकारा तू बर चाहिए बर चाहिए
बाबाजी हूं बाबाजी ना दुल्हन चाहिए, भजन चाहिए,
इस दिल में समाया वो हर चाहिए वो हर चाहिए-किस्सा-पूर्णमल
तर्ज-दीवाने हैं दीवानों का ना घर चाहिए
9. अपना रस्ता नाप मेरे तै दूर हो लिए।
चन्द्रमा से मुखड़े आली हंस के बोलिए।। किस्सा-बीजा सोरठ