किस्सा-राजा भोज-शरवणदेह-1,रचयिता-श्री लखमीचन्द/वर्ष-1988/Raja Bhoj Sharndeh Sonotone- KPS- 1990
Satyaveer Kundu
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किस्सा-राजा भोज-शरवणदेह-1,रचयिता-श्री लखमीचन्द/वर्ष-1988/Raja Bhoj Sharndeh Sonotone- KPS- 1990
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किस्सा-राजा भोज-शरवणदेह-1,
रचयिता-श्री लखमीचन्द, कर्मपाल शर्मा
गायक-कर्मपाल शर्मा और साथी
प्रस्तुति-सोनोटोन कैसेटस,
प्रस्तुति वर्ष-1988
1. बैठी-बैठी कमरै के मां चरखां काते चार सखि।
ब्याह शादी के बारे में करण लगी तकरार सखि।।
2. पीहर के मां फिरै शरणदेह कुछ तै तू शरमा ले।
राजा भोज सै तेरी जोड़ी का उसतै ब्याह करवा ले।।
3. जो ज्यादा बकोगी थारी खैर भी नहीं।
राजा भोज जिसै पै धुवाउँ पैर भी नहीं।।
तर्ज-तेरे मन की गंगा और मेरे मन की जमना का
4. कर दी आपस के मां आल, कठी हो रही सो छिनाल,
मनै देती कौणसी गाल, थारे मैं बताओ तो सही।।
5. गैर जुबां बोलण आली ना कोई म्हारे मै।
भोज पै पैर धुवावण आली कौणसी थारे मैं।।
6. जिसा ठिकाना चाहूं आज होग्यी मन की चाही।
मेरी समझ मैं आ ग्यी कर ले राज तै असनाई।।
7. नाई थी राणी होग्यी शरणदेह तेरे भाग।
तेरे रूप की राजा भोज कै चोट लाग गई थी लाग।।
8. तेरी माया अपरम्पार हे शिव भोले भण्डारी।।
(बोनस गीत)