श्री दुर्गा सप्तशती - छठा अध्याय | धूम्रलोचन वध (सटीक पाठ और अर्थ)🙏♥️
प्रभु दर्शन
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श्री दुर्गा सप्तशती - छठा अध्याय | धूम्रलोचन वध (सटीक पाठ और अर्थ)🙏♥️
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प्रभु दर्शन
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जय माता दी!
श्री दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय में आपका स्वागत है। इस अध्याय को 'धूम्रलोचन वध' के नाम से जाना जाता है।जब शुम्भ और निशुम्भ को पता चलता है कि माँ दुर्गा उनके प्रस्ताव को ठुकरा चुकी हैं, तो वे क्रोधित होकर अपने सेनापति धूम्रलोचन को साठ हजार असुरों की सेना के साथ माँ दुर्गा को बंदी बनाने के लिए भेजते हैं। इस अध्याय में वर्णन है कि कैसे परम शक्तिशाली माँ दुर्गा ने केवल अपनी एक 'हुंकार' (गर्जना) मात्र से महाबलशाली असुर धूम्रलोचन को भस्म कर दिया और उनकी सेना का विनाश किया।
♥️इस वीडियो में आप पाएंगे:
💠दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय का शुद्ध एवं स्पष्ट पाठ।
💠हर श्लोक का सरल हिन्दी अनुवाद/भावार्थ।
💠माँ दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप का दिव्य ध्यान।
💠छठे अध्याय के पाठ का महत्व:
💠दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय का नियमित पाठ करने से जीवन से हर प्रकार के भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और कोर्ट-कचहरी के मामलों से मुक्ति मिलती है। माँ भगवती की कृपा से भक्तों के आत्मबल में वृद्धि होती है।
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