भक्तामर स्तोत्र श्लोक 5 | जब एक हिरणी सिंह के सामने खड़ी हो गई! 🙏
Swami Girish Bharti
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भक्तामर स्तोत्र श्लोक 5 | जब एक हिरणी सिंह के सामने खड़ी हो गई! 🙏
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Swami Girish Bharti
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🙏 श्री भक्तामर स्तोत्र — श्लोक ५
क्या प्रेम और भक्ति हमें हमारी शक्ति से भी आगे ले जा सकते हैं?
इस श्लोक में आचार्य श्री १०८ मानतुंग स्वामी भगवान आदिनाथ की स्तुति करते हुए कहते हैं कि अपनी सीमित शक्ति जानते हुए भी वे प्रभु की महिमा गाने का साहस करते हैं।
जैसे एक हिरणी अपने बच्चे की रक्षा के लिए सिंह के सामने भी खड़ी हो जाती है, वैसे ही सच्ची भक्ति असंभव लगने वाले कार्य का साहस देती है।
🙏 श्री भक्तामर स्तोत्र के सभी संस्कृत श्लोक क्रम से सुनें।
🌸 पूरी श्रृंखला की प्लेलिस्ट यहाँ देखें:
• श्री भक्तामर स्तोत्र | मूल संस्कृत पाठ
🙏 जय जिनेन्द्र
स्वर एवं प्रस्तुति: स्वामी गिरीश भारती
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