भक्तामर स्तोत्र श्लोक 3 | जब बालक चाँद को पकड़ने चला | संस्कृत पाठ
Swami Girish Bharti
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भक्तामर स्तोत्र श्लोक 3 | जब बालक चाँद को पकड़ने चला | संस्कृत पाठ
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Swami Girish Bharti
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🙏 श्री भक्तामर स्तोत्र — श्लोक 3
श्लोक का सरल अर्थ:
आचार्य मानतुंग स्वामी कहते हैं—
हे भगवान आदिनाथ! आपके चरणों की पूजा देवता भी करते हैं।
मैं अपनी बुद्धि की सीमाएँ जानते हुए भी आपकी स्तुति करने चला हूँ।
जैसे एक छोटा बच्चा पानी में दिखाई देने वाले चाँद को पकड़ने की कोशिश करता है, वैसे ही मैं भी आपकी अनंत महिमा का वर्णन करने का साहस कर रहा हूँ।
आज के जीवन में संदेश:
भक्ति में अपनी सीमाओं को पहचानना भी विनम्रता है। सच्ची श्रद्धा के साथ किया गया छोटा-सा प्रयास भी हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है।
इस वीडियो में श्री भक्तामर स्तोत्र के तीसरे श्लोक का मूल संस्कृत पाठ प्रस्तुत है।
🙏 श्री भक्तामर स्तोत्र के सभी संस्कृत श्लोक क्रम से सुनें।
🌸 पूरी श्रृंखला की प्लेलिस्ट यहाँ देखें:
• श्री भक्तामर स्तोत्र | मूल संस्कृत पाठ
रचनाकार: आचार्य श्री 108 मानतुंग स्वामी
प्रस्तुति: स्वामी गिरीश भारती
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