परमात्मा शब्दों से नहीं, तुम्हारे हृदय से मिलता है | Osho
Khud Se Puch
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परमात्मा शब्दों से नहीं, तुम्हारे हृदय से मिलता है | Osho
30 просмотров · 9 ч назад
Khud Se Puch
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क्या परमात्मा सच में हमारी प्रार्थनाओं और मीठे शब्दों से प्रसन्न होता है? या वह हमारे हृदय में छिपे भावों को देखता है?
ओशो इस गहरी बात को समझाते हैं कि मीठा बोलना और भीतर से मीठा होना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
हम अक्सर लोगों के सामने प्रेम से बात करते हैं, उनकी प्रशंसा करते हैं, लेकिन मन के भीतर ईर्ष्या, क्रोध, जलन और नफरत छिपाए रखते हैं।
क्या ऐसी वाणी में सचमुच प्रेम हो सकता है?
इस वीडियो में जानिए:
परमात्मा शब्दों से नहीं, भावों से क्यों जुड़ा है?
मीठा बोलना और मीठा होना क्यों अलग है?
हमारी कड़वी वाणी सबसे पहले हमें ही नुकसान क्यों पहुंचाती है?
ईर्ष्या और अहंकार हमारे भीतर प्रेम को कैसे खत्म करते हैं?
सच्ची मिठास और प्रेम का जन्म हृदय में कैसे होता है?
ओशो की यह बात हमें याद दिलाती है कि परमात्मा को खोजने से पहले अपने भीतर प्रेम, करुणा और मिठास को जगाना जरूरी है।
एक सवाल खुद से पूछिए:
क्या मेरी वाणी में वही प्रेम है, जो मैं दुनिया को दिखाता हूं?
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