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"सृष्टि की रचना — 7 दिन"//

Sihan Gamit

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"सृष्टि की रचना — 7 दिन"//

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Sihan Gamit
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शुरुआत में जब चारों ओर केवल गहरा अंधेरा और जल था, तब ईश्वर ने अपने वचन से इस सुंदर संसार की रचना की। ​पहला दिन: ईश्वर ने कहा, "उजाला हो जाए," और प्रकाश उत्पन्न हुआ। उन्होंने प्रकाश को 'दिन' और अंधेरे को 'रात' कहा। दूसरा दिन: प्रभु ने जल को दो भागों में बांटकर बीच में एक विशाल 'आकाश' बनाया। तीसरा दिन: पृथ्वी पर इकट्ठा हुए जल से 'समुद्र' और सूखी जमीन से 'पृथ्वी' बनी। फिर ईश्वर के आदेश से पृथ्वी पर हरी घास, पौधे और फलदार पेड़ उग आए। चौथा दिन: समय, ऋतुओं और दिन-रात के संचालन के लिए उन्होंने आकाश में सूर्य, चंद्रमा और अनगिनत तारों को रचा। पांचवां दिन: समुद्र रंग-बिरंगी मछलियों और जलचरों से भर गया और आकाश में तरह-तरह के पक्षी उड़ने लगे। छठा दिन: प्रभु ने पृथ्वी पर भांति-भांति के पशु-पक्षी और रेंगने वाले जीव बनाए। इसके बाद उन्होंने अपनी सबसे श्रेष्ठ रचना—'मनुष्य' को अपने स्वरूप में बनाया और उसे पूरी सृष्टि की देखरेख का अधिकार दिया। ​ईश्वर ने देखा कि सब कुछ बहुत सुंदर बना है। छह दिनों में अपना संपूर्ण कार्य समाप्त कर, सातवें दिन प्रभु ने विश्राम किया और उस दिन को पवित्र ठहराया।