प्रवचन सुन लेना धर्मध्यान नहीं, सुने हुए को समझना और जीवन में उतारना जरूरी युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी
AnandMahendraVani и CHAPLOT MEDIA CONCEPT
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प्रवचन सुन लेना धर्मध्यान नहीं, सुने हुए को समझना और जीवन में उतारना जरूरी युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी
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📿 आनंद अनुभूति चातुर्मास — भीलवाड़ा 2026
🙏 पर्वाधिराज पर्युषण पूर्व विशेष प्रवचन
📅 7 सितंबर 2026
📍 शांतिभवन, भीलवाड़ा
श्रमणसंघीय युवाचार्य प्रवर परम पूज्य श्री महेन्द्र ऋषिजी म.सा. ने पर्वाधिराज पर्युषण के पूर्व दिवस पर धर्मध्यान का वास्तविक स्वरूप समझाते हुए कहा कि धर्म केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि मन को धर्म में स्थिर और एकाग्र करने की प्रक्रिया है।
मनुष्य सुख चाहता है, लेकिन सुख के अपने-अपने पैमाने बना लेता है।
व्यापारी कहता है—लाभ हुआ तो सुख।
डॉक्टर कह सकता है—स्वास्थ्य है तो सुख।
ज्योतिषी ग्रह-दशा में सुख-दुःख देख सकता है।
लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि कहती है—
सुख का मूल धर्म है और दुःख का मूल पाप।
धन भी तभी शांति देगा जब वह धर्मसम्मत मार्ग से आया हो।
धर्म में एकाग्रता का पुरुषार्थ करें।
▶️ पूर्ण प्रवचन देखें:
/ @anandmahendravani
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