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भाग 5 | उपासना क्या है? | उपासना के 32 अपराध | श्री उड़िया बाबा जी महाराज के उपदेश

नामामृतम्

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भाग 5 | उपासना क्या है? | उपासना के 32 अपराध | श्री उड़िया बाबा जी महाराज के उपदेश

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नामामृतम्
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उपासना वास्तव में क्या है? भगवान की उपासना किस प्रकार करनी चाहिए? पूजा और सेवा में क्या अंतर है? साकार और निराकार उपासना में क्या भेद है? और वे कौन-से 32 अपराध हैं जिनसे उपासक को बचना चाहिए? श्री उड़िया बाबा जी महाराज के उपदेश — Episode 5 में महाराज जी उपासना-तत्त्व को अत्यन्त सरल और गम्भीर रूप में समझाते हैं। महाराज जी बताते हैं कि जो वस्तु रूप, रस, गन्ध, स्पर्श और शब्द से परे है, वही भगवान का निराकार स्वरूप है। सम्पूर्ण विषयों को त्यागकर तदाकार वृत्ति करना ही उपासना है। इस उपदेश में पूजा और सेवा का भेद, साकार एवं निराकार उपासना, उपासना में भाव और निष्ठा का महत्त्व तथा उपासक के लिए आवश्यक नियमों का वर्णन आता है। साथ ही महाराज जी उपासना में बताए गए सभी 32 अपराधों का उल्लेख करते हैं—ऐसे आचरण जिनका त्याग करके साधक को श्रद्धा, नियम और सावधानीपूर्वक भगवान की उपासना करनी चाहिए। यह प्रस्तुति श्री उड़िया बाबा जी महाराज के उपदेशों पर आधारित है और मूल भाव एवं शिक्षाओं को यथासंभव सुरक्षित रखते हुए प्रस्तुत की गई है। श्री उड़िया बाबा जी महाराज के श्रीचरणों में प्रणाम। राधे कृष्ण। हरि नाम ही जीवन का सार है। Namamritam | नामामृतम् #उड़ियाबाबाजी #उड़ियाबाबाजीमहाराज #उपासना #उपासनातत्त्व #भक्ति #भगवानकीउपासना #पूजा #सेवा #सनातनधर्म #साधना #भजन #Namamritam #नामामृतम्