अलेख परमब्रह्म भजन सुनिए | मन को शांति देने वाला भक्ति गीत | Alekh Bhajan
Bramh kunj bhakti jagran
0:00 / 0:00
अलेख परमब्रह्म भजन सुनिए | मन को शांति देने वाला भक्ति गीत | Alekh Bhajan
196 просмотров · 1 день назад
Bramh kunj bhakti jagran
1,14 тыс. подписчиков
196 просмотров · 1 день назад
अलेख परमब्रह्म भजन सुनिए | मन को शांति देने वाला भक्ति गीत | Alekh Bhajan
🙏 जय अलेख परमब्रह्म! जय अलेख महिमा! 🙏
चैनल: ब्रह्म कुंज भक्ति जागरण
अगर आपको यह भजन पसंद आए, तो वीडियो को LIKE करें, अपने परिवार एवं मित्रों के साथ SHARE करें और ऐसे ही भक्ति गीतों के लिए चैनल को SUBSCRIBE करना न भूलें।
🔔 घंटी दबाएँ और परमब्रह्म अलेख भगवान की महिमा से जुड़े नए भजनों का आनंद लें।
🙏 जय अलेख परमब्रह्म!
🕉️ ॐ शांति... ॐ शांति... ॐ...
#अलेखपरमब्रह्म #अलेखमहिमा #अलेखभजन #परमब्रह्म #भक्तिभजन
bhajan
ॐ... ॐ... ॐ...
अलेख... अलेख... महिमा... महिमा...
हे निराकार, हे निरंजन, हे परमब्रह्म भगवान। न रूप तुम्हारा, न रंग तुम्हारा, फिर भी तुमसे जगत महान।
शून्य में तुम, अनंत में तुम, कण-कण में तेरा प्रकाश। हे दीनदयाल, हे कृपानिधान, तुमसे ही जीवन की आस।
ॐ... ॐ... अलेख... ॐ... ॐ... महिमा...
अलेख... अलेख... अलेख... परमब्रह्म अलेख...
अलेख परमब्रह्म हे, तुम जगत के नाथ, तेरा नाम जपते-जपते बीतें मेरे दिन-रात। ॐकार की ध्वनि में तुम, शून्य की महाज्योति, तेरे चरणों में प्रभु, लीन हो मेरी ज्योति।।
अलेख परमब्रह्म हे, महिमा तेरी अपार, तेरी कृपा से पार हो जाऊँ, यह जीवन की पुकार। नहीं तुम्हारा आदि प्रभु, नहीं तुम्हारा अंत, तेरी महिमा गाता जाए मेरा मन अनंत।।
अलेख... अलेख... जय अलेख भगवान, महिमा... महिमा... परमब्रह्म महान। अलेख... अलेख... तू ही मेरा आधार, तेरे नाम से पार हो जाऊँ भवसागर संसार।।
माया के इस मेले में, मन मेरा भरमाया, सुख की छाया खोजते-खोजते, दुःख ने मुझे सताया। धन-दौलत और मान की खातिर, जीवन बीत रहा, तेरे बिना हे परमपिता, मन मेरा रीता रहा।।
झूठे जग के रिश्ते सारे, पल में छूट जाएँ, कालचक्र की गति में प्रभु, सब सपने मिट जाएँ। तेरा नाम ही सच्चा साथी, तेरा नाम आधार, तेरी भक्ति से मिल सकता है, भवसागर से पार।।माया-मोह मिटा दो प्रभु, मन को राह दिखाओ, अलेख परमब्रह्म मेरे, अपने चरण लगाओ। अलेख... अलेख... जय अलेख भगवान, तेरे नाम में बसता मेरा सारा जहान।।
🎵 नहीं तुम्हारी कोई सीमा, नहीं तुम्हारा आकार, फिर भी तेरी शक्ति से चलता, यह सारा संसार। नयन न देखें, मन न जाने, बुद्धि रहे हैरान, तेरी महिमा कौन समझे प्रभु, तू सबसे महान।।
न तुम मंदिर में सीमित हो, न किसी एक द्वार, सच्चे मन की पुकार में प्रभु, तेरा ही दीदार। शून्य तुम्हारा दिव्य आसन, ओंकार तुम्हारी तान, तेरी महिमा गूँज रही है, धरती और आसमान।।
तू निराकार, तू निर्विकार, तेरी महिमा अपरंपार। अलेख... अलेख... परमब्रह्म भगवान, तेरे चरणों में मेरा प्रणाम।
कर्मों की इस डोरी में, बँधा हुआ इंसान, अपने ही कर्मों से पाता, सुख-दुःख का परिणाम। लोभ-मोह के बंधन काटो, अहंकार मिटाओ, हे करुणामय परमब्रह्म, सच्ची राह दिखाओ।।
निष्काम कर्म की राह पर चलकर, सेवा धर्म निभाऊँ, बिना किसी फल की इच्छा के, सबके काम मैं आऊँ। द्वेष मिटे और प्रेम जगे, करुणा का हो वास, तेरी कृपा से पूर्ण हो प्रभु, जीवन की हर आस।।
कर्मों के बंधन काट दो, हे प्रभु दयाल, तेरी शरण में मिल जाए, मुक्ति का उजियाल। अलेख... अलेख... मेरी सुन ले पुकार, तेरी कृपा से हो जाए जीवन भव से पार।।
🎵 मन के भीतर दीप जलाओ, मिट जाए अंधकार, सत्य-ज्ञान की राह दिखाओ, हे प्रभु पालनहार। क्रोध मिटे और लोभ मिटे, मिट जाए अभिमान, हर प्राणी में तेरा दर्शन, हर हृदय में सम्मान।।
निंदा से मन दूर रहे, वाणी में मधुरता, सेवा में आनंद मिले और हृदय में पवित्रता। तेरे नाम का अमृत पीकर, मन निर्मल हो जाए, अलेख प्रभु की महिमा गाकर, जीवन सफल हो जाए।।
ज्ञान का दीप जले, मन का तम मिटे, तेरी कृपा से प्रभु, सारे बंधन कटें। अलेख... अलेख... जय परमब्रह्म महान, तेरे चरणों में अर्पित मेरा तन-मन-प्राण।।
🎵
🎵जाग्रत में तू, स्वप्न में तू, निद्रा में भी तू, मेरे मन की हर धड़कन में, प्रभु बसता है तू। जब संसार की भीड़ में, मन मेरा घबराए, तेरी मौन कृपा की छाया, मुझको राह दिखाए।।
अंतरमन के मंदिर में, तेरी ज्योति समाई, बाहर तुझको खोज रहा था, भीतर सुधि न आई। जब से तेरी शरण में आया, मन को मिला विश्राम, अलेख परमब्रह्म मेरे, तुझको शत-शत प्रणाम।।
भीतर तू, बाहर तू, साँसों में हर पल तू। अलेख... अलेख... परमात्मा महान, तेरे चरणों में मेरा जीवन और प्राण।।
🎵धन भी छूटे, मान भी छूटे, छूटे जग की माया, खाली हाथ यहाँ आया था, खाली हाथ ही जाना। किस बात का गर्व करूँ मैं, किस बात का अभिमान, तेरी कृपा से मिला है मुझको, जीवन और सम्मान।।
झूठे मोह के बंधन तोड़ूँ, सच्चाई अपनाऊँ, दीन-दुखी और पीड़ित जन की, सेवा करता जाऊँ। निष्काम प्रेम हृदय में भर दे, मिट जाए अज्ञान, अलेख प्रभु तेरी भक्ति में, समर्पित हो प्राण।।
ना धन माँगूँ, ना मान माँगूँ, ना जग का सम्मान। बस इतनी कृपा कर दो प्रभु, मिले तेरा ज्ञान।।
अलेख... अलेख... जय अलेख भगवान, तेरे चरणों में अर्पित मेरा जीवन और प्राण।।
🎵 तू ही सृष्टि का आदि प्रभु, तू ही पालनहार, तेरी शक्ति से चलता जग का जीवन और संसार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश में तेरी महिमा का विस्तार, परमब्रह्म हे अलेख प्रभु, तू ही परम आधार।।
तू ही अंतरात्मा सबकी, तू ही सर्वेश्वर, तेरी सत्ता से प्रकाशित, धरती और अंबर। भेदभाव सब दूर हों प्रभु, प्रेम बने व्यवहार, तेरी शरण में जग को मिल जाए शांति अपार।।
तू ही आदि, तू अनंत, तेरी महिमा शाश्वत सत्य। अलेख... अलेख... परमब्रह्म भगवान, तेरी महिमा गाए सारा जहान।।
जन्म मिला तो कर्म करूँ मैं, सत्य की राह चलूँ, तेरी दी हुई साँसों से प्रभु, तेरा ही गुण गाऊँ। मृत्यु का भय मन से मिट जाए, मोह का बंधन टूटे, तेरी कृपा से आत्मज्ञान का, बंद द्वार भी खुले।।
न जाने कितने जन्मों से, तुझको रहा पुकार, अब तो अपनी शरण में ले ले, हे प्रभु पालनहार। मुक्ति मिले या भक्ति मिले, तेरी इच्छा मानूँ, तेरे चरणों में रहकर प्रभु, तुझको ही पहचानूँ।।