बेसहारा पशु बना रहे सस्ती बिजली: ₹1.5/यूनिट में आत्मनिर्भर बना किसान | Gaon Junction LIVE
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बेसहारा पशु बना रहे सस्ती बिजली: ₹1.5/यूनिट में आत्मनिर्भर बना किसान | Gaon Junction LIVE
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लखनऊ के सिद्धपुरा गांव में पूर्व DSP शैलेंद्र सिंह ने आवारा सांडों और बैलों की मदद से सस्ती बिजली उत्पादन का अनोखा मॉडल तैयार किया है। यह सिस्टम ग्रेविटी और फ्लाईव्हील तकनीक पर आधारित है, जिसमें बैलों की चलने की शक्ति को ऊर्जा में बदला जाता है। एक बैल से करीब 5KW और सोलर के साथ हाइब्रिड करने पर 10KW तक बिजली उत्पादन संभव है। इसी ऊर्जा से फार्म पर सिंचाई, आटा चक्की, कोल्हू और लाइटिंग जैसी सभी जरूरतें पूरी हो रही हैं। खास बात यह है कि इस मॉडल से बिजली उत्पादन की लागत ₹1.50 प्रति यूनिट से भी कम है, जो सोलर से भी सस्ती पड़ती है। पिछले 10 वर्षों से यह फार्म पूरी तरह आत्मनिर्भर है और किसी बाहरी बिजली कनेक्शन पर निर्भर नहीं है। यह पहल न सिर्फ किसानों के खर्च को कम कर रही है, बल्कि आवारा पशुओं को आय का जरिया बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
गांव जंक्शन के लिए शैलेश अरोड़ा की रिपोर्ट..
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HIGHLIGHTS
आवारा सांडों से सस्ती बिजली का मॉडल
बैलों की ताकत बनी ऊर्जा का नया स्रोत
सोलर से भी कम लागत में बिजली उत्पादन
एक बैल से 5KW, हाइब्रिड में 10KW तक पावर
खेती, चक्की और सिंचाई सब कुछ इसी ऊर्जा से
पशु बोझ नहीं, कमाई का जरिया
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