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गुस्सा, डर और Stress से आज़ादी का एक तरीका | अपने शरीर में वापस आइए | Iqbal Singh Bains | Abhishek J

The Life School Bhopal

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गुस्सा, डर और Stress से आज़ादी का एक तरीका | अपने शरीर में वापस आइए | Iqbal Singh Bains | Abhishek J

24 просмотра · 12 ч назад
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क्या आपका Boss ऑफिस से घर तक आपके साथ आता है? क्या किसी की कही हुई बात घंटों आपके दिमाग में चलती रहती है? क्या गुस्सा, डर या stress आते ही आप अपने आप react करने लगते हैं? शायद समस्या यह नहीं है कि आपके thoughts बहुत ज्यादा हैं। शायद समस्या यह है कि आपका ध्यान हमेशा thoughts में रहता है। Prayogshala के इस तीसरे episode में Abhishek Kumar Jhawar और Iqbal Singh Bains एक बहुत practical सवाल explore करते हैं: हम अपने thoughts और emotions के गुलाम बने बिना कैसे जी सकते हैं? पिछले episode में हमने Freedom, Responsibility और conscious response की बात की थी। इस episode में उस freedom को रोज़मर्रा की जिंदगी में practice करने का एक प्रयोग सामने आता है—अपने शरीर में वापस लौटना। जब गुस्सा आता है, तो हम अपना ध्यान उस व्यक्ति पर लगा देते हैं जिसने हमें trigger किया। लेकिन शरीर के अंदर क्या हो रहा है? Heartbeat बढ़ रही है। Breathing बदल रही है। Chest में pressure है। Stomach में हलचल है। शरीर में गर्मी या बेचैनी है। ये sensations ही उस emotion का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर उस समय हम कहानी को पकड़ने के बजाय उन sensations को simply observe करना सीखें—बिना उन्हें बढ़ाए, घटाए या बदलने की कोशिश किए—तो क्या हमारे पास प्रतिक्रिया देने से पहले एक choice पैदा हो सकती है? यही इस episode का प्रयोग है। इस episode में हम बात करते हैं: • क्या हम वास्तव में अपने शरीर में रहते हैं या अपने thoughts में? • Overthinking को control करने के बजाय क्या किया जा सकता है? • Anger शरीर में कैसे महसूस होता है? • Fear की body sensations क्या हैं? • “Come back to the body” का वास्तविक अर्थ क्या है? • Thoughts को control किए बिना उनके प्रभाव से कैसे मुक्त हों? • Awareness negative emotions को कैसे dissolve कर सकती है? • Boss को office में छोड़कर घर कैसे आएँ? • Stage fear और anxiety के समय क्या किया जा सकता है? • रोज़मर्रा में 15-second awareness practice कैसे करें? • और क्यों 10–12 मिनट की छोटी-छोटी practices पूरे दिन की quality बदल सकती हैं? Iqbal Singh Bains इस practice को एक simple principle में रखते हैं: “Don't change the sensation. Just notice it.” Freedom कोई magic pill नहीं है। यह एक discipline है। अपने attention को बार-बार thoughts से हटाकर body sensations पर लाने की discipline। और शायद इसी अभ्यास से वह space पैदा होता है जहाँ— Trigger और Reaction के बीच Choice जन्म लेती है। यह episode सिर्फ सुनने के लिए नहीं है। इसे प्रयोग करके देखने के लिए है। Prayogshala में आपका स्वागत है। Hosted by: Abhishek Kumar Jhawar Special Guest: Iqbal Singh Bains #Prayogshala #IqbalSinghBains #InnerFreedom #Awareness #Mindfulness #Stress #AngerManagement #Overthinking #SelfAwareness #ConsciousLiving #BodyAwareness #TheLifeSchoolBhopal