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रविवार- सूर्य चालीसा पाठ | Surya Chalisa |सूर्य देव को प्रसन्न करने का सरल उपाय |कष्ट और बाधाएं दूर

Ganga Bhakti Mantra

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रविवार- सूर्य चालीसा पाठ | Surya Chalisa |सूर्य देव को प्रसन्न करने का सरल उपाय |कष्ट और बाधाएं दूर

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You are listening “रविवार प्रातः सूर्य चालीसा पाठ | Surya Chalisa | सूर्य देव को प्रसन्न करने का सरल उपाय | कष्ट और बाधाएं दूर” now! 🙏 ॐ सूर्याय नमः 🙏 रविवार के पावन दिन प्रातःकाल सूर्य चालीसा (Surya Chalisa) का श्रद्धापूर्वक श्रवण और पाठ करें। सूर्य देव को हिंदू धर्म में प्रकाश, ऊर्जा, तेज, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यह भक्तिमय सूर्य चालीसा पाठ आपको आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और सूर्य देव की भक्ति से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम है। 🌞 रविवार Special Surya Chalisa सुनें और अपने दिन की शुरुआत सूर्य देव के स्मरण एवं भक्ति से करें। नियमित रूप से श्रद्धा और विश्वास के साथ सूर्य उपासना करने से मन में सकारात्मकता, आत्मबल और जीवन में नई ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। ✨ इस वीडियो में सुनें: 🔸 सूर्य चालीसा 🔸 Surya Chalisa 🔸 सूर्य देव की महिमा 🔸 रविवार प्रातःकाल भक्ति 🔸 सूर्य देव मंत्र एवं स्तुति 🔸 Surya Dev Bhajan 🔸 रविवार Special Bhajan 🔸 सूर्य उपासना एवं भक्ति 🙏 सूर्य देव की कृपा से जीवन में प्रकाश, सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🎵 SONG CREDITS ✱ Song Name: Surya Chalisa ✱ Singer: Komal Vasisth ✱ Lyrics: Traditional ✱ Music: KK Oberoi ✱ Copyright: Ganga Bhakti Mantra ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ अगर आपको सूर्य चालीसा, सूर्य देव के भजन, शिव भजन, माता रानी के भजन, श्री राम भजन, कृष्ण भजन, गणेश भजन, शनिदेव चालीसा, हनुमान चालीसा और अन्य devotional bhajans पसंद हैं, तो Ganga Bhakti Mantra YouTube Channel को Subscribe जरूर करें। 🔔 Subscribe करें और Bell Icon दबाएं ताकि आने वाले नए भजन और चालीसा पाठ की जानकारी आपको सबसे पहले मिले। 👍 वीडियो पसंद आए तो LIKE करें 💬 अपने विचार COMMENT में जरूर बताएं 📲 अपने परिवार और भक्तों के साथ SHARE करें 🔔 SUBSCRIBE – LIKE – COMMENT – SHARE ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞 सूर्य चालीसा | Surya Chalisa Lyrics दोहा कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।। चौपाई जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर। भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर। विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन। अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते। सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगण होत प्रसन्न मोदलहि। अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर। मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी। उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते। मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, कलिहर। पूषा, रवि, आदित्य नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै। द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै। चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै। नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह। सेवै भानु तुम्हें मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहि पाई। बारह नाम उच्चारण करते, सहस जनम के पातक टरते। उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन। छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबल मोह को फंद कटतु है। अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते। सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत। भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित। ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे। कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा। पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर। युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन। बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर। जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा। विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी। सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे। अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं। दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जो जन याको मन मंह जापै। अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता। ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही। मन्द सदृश सुत जग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके। धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा। भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों। परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी। अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय। भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै। यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता। अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं। दोहा भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य। सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ #SuryaChalisa #सूर्यचालीसा #SuryaDev #सूर्यदेव #Ravivar #रविवार #SuryaBhajan #सूर्यउपासना #DevotionalBhajan #Bhakti #Bhajan #GangaBhaktiMantra