#133 मोहे भूल गये साँवरिया-भजन (2018)। Swami Prem Vivekanand-Mohe Bhool Gaye Sanvariya-Bhajan (2018)
Bhajan Swami Prem Sadhana Kendra भजन स्वामी प्रेम
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#133 मोहे भूल गये साँवरिया-भजन (2018)। Swami Prem Vivekanand-Mohe Bhool Gaye Sanvariya-Bhajan (2018)
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जो मैं ऐसा जानती, कि प्रीत किये दुःख होए
नगर ढिंढोरा पीटती, कि प्रीत न करियो कोए
मोहे भूल गये साँवरिया, भूल गये साँवरिया
आवन कह गये अजहुँ न आये-2, लीन्हीं न मोरी खबरिया।
1. दिल को दिए क्यों दुःख बिरहा के, तोड़ दिया क्यों महल बना के,
आस दिला के ओ बेदर्दी-2, फेर ली काहे नजरिया।
2. नैन कहे रो-रो के सजना, देख चुके हम प्यार का सपना,
प्रीत है झूठी, प्रीतम झूठा, झूठी है सारी नगरिया।
3. मन मोहन प्यारे गिरधारी, पंथ निहारूँ कब की ठाड़ी
तुम बिन सूना जीवन मोरा, बीती जाये उमरिया।
4. दरस दिखा दो हरे मुरारे, तुम बिन व्याकुल प्राण हमारे
दीनबन्धु मोहे कण्ठ लगा लो, भटकूँ डगर-डगरिया।