रोज़ी के लिए निकला था… लेकिन दिल तो घर में ही रह गया | दर्दभरी सूफ़ियाना नज़्म
Attari Islamic studio
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रोज़ी के लिए निकला था… लेकिन दिल तो घर में ही रह गया | दर्दभरी सूफ़ियाना नज़्म
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रोज़ी की तलाश में इंसान घर से दूर निकल जाता है…
लेकिन माँ की दुआएँ, घर की मिट्टी और अपने वतन की याद दिल से कभी दूर नहीं होती। 💔
“रोज़ी के लिए निकला था… लेकिन दिल तो घर में ही रह गया”
एक दर्दभरी सूफ़ियाना नज़्म, उन लोगों के नाम जो अपनों से दूर रहकर मेहनत कर रहे हैं।
अगर यह नज़्म आपके दिल को छू जाए तो
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