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श्रीमान का स्वागत - बालमुकुन्द गुप्त

सृजन-विमर्श (बात, साहित्य की...)

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श्रीमान का स्वागत - बालमुकुन्द गुप्त

50 просмотров · 4 дн. назад
सृजन-विमर्श (बात, साहित्य की...)
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"श्रीमान का स्वागत" निबंध बालमुकुन्द गुप्त का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक महत्त्व का निबंध है। यह निबंध भारतमित्र पत्रिका में 26 नवंबर, 1904 को प्रकाशित हुआ था। बाद में इसे "शिवशंभु के चिट्ठे" शीर्षक निबंध-संकलन में संकलित किया गया था। इसमें उनकी व्यंग्य-विनोद की सजीव शैली के दर्शन होते हैं। इनमें औपनिवेशिक शासन खासकर लार्ड कर्जन की क्रूरता का लाक्षणिक निरूपण हुआ है।