पुण्य कैसे कमाएँ ? जैन दर्शन का उत्तर
Jain Kwiz
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पुण्य कैसे कमाएँ ? जैन दर्शन का उत्तर
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दो व्यक्ति एक ही मंदिर में एक जैसा दान करें — क्या दोनों को बराबर पुण्य मिलेगा? जैन दर्शन कहता है: नहीं। पुण्य क्रिया से नहीं, भाव (अभिप्राय) से बँधता है।
इस वीडियो में: • पुण्य की शास्त्रीय परिभाषा — "सुहपरिणामो पुण्णं" (प्रवचनसार) • क्रिया या अभिप्राय — आप्तमीमांसा का दूध-काँटा तर्क • राजा श्रेणिक और मेंढक की कथा — दर्दुरांक देव • निदान (फल की इच्छा) से पुण्य फीका क्यों — "पुण्णे वि ण आयरं कुणह" • पुण्य के प्रकार — पापानुबंधी, पुण्यानुबंधी और सातिशय पुण्य • पंचास्तिकाय गाथा 135 — पुण्य के तीन कारण
शिक्षा: पुण्य क्रिया से नहीं, भाव से बँधता है। फल की इच्छा जितनी कम, पुण्य उतना गाढ़ा। सम्यग्दर्शन सहित पुण्य ही सातिशय पुण्य है।
⏱ 0:00 प्रश्न · 0:22 पुण्य क्या है? · 0:40 क्रिया या अभिप्राय? · 1:01 आप्तमीमांसा का तर्क · 1:21 मेंढक की कथा · 1:49 दर्दुरांक देव · 2:06 निदान · 2:31 पुण्य के प्रकार · 2:52 सातिशय पुण्य · 3:21 पुण्य कैसे कमाएँ? · 3:52 आज की शिक्षा
अच्छा लगे तो लाइक करें, परिवार के साथ शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। जय जिनेंद्र। #JainDharma #Punya #SatishayPunya #JainKatha #Digambar #JainPhilosophy #PunyaKaiseKamaye #जैनधर्म #पुण्य