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Story of Noah#bibel story of Noah.how flood comes in the world in Noah time.

Mr Kashop

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Story of Noah#bibel story of Noah.how flood comes in the world in Noah time.

30 просмотров · 11 дней назад
Mr Kashop
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बहुत समय बीत चुका था। पृथ्वी पर मनुष्यों की संख्या बढ़ती गई, लेकिन उनके बीच हिंसा, बुराई और भ्रष्टाचार भी बढ़ता गया।#परमेश्वर ने देखा कि मनुष्य के विचार और व्यवहार लगातार बुराई की ओर जा रहे हैं। लेकिन उस पीढ़ी में नूह एक धर्मी और परमेश्वर पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति था। परमेश्वर की चेतावनी परमेश्वर ने नूह से कहा कि पृथ्वी हिंसा से भर गई है और वह एक विशाल जलप्रलय भेजने वाला है। लेकिन नूह और उसके परिवार को बचाने के लिए परमेश्वर ने उसे एक विशाल जहाज़ बनाने का आदेश दिया—इसे सन्दूक (Ark) कहा गया। नूह को जहाज़ को मजबूत बनाने और उसके अंदर रहने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। नूह ने सन्दूक बनाया लोगों के लिए यह काम अजीब था। कल्पना कीजिए—एक विशाल जहाज़ तैयार किया जा रहा था, जबकि उस समय ऐसा कोई जलप्रलय दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन नूह ने परमेश्वर की आज्ञा पर विश्वास किया। उसने अपने पुत्रों के साथ मिलकर सन्दूक बनाया और उसमें भोजन तथा आवश्यक चीज़ें जमा कीं। जानवर सन्दूक में आए समय आने पर विभिन्न प्रकार के जानवर सन्दूक में आने लगे। बाइबल के अनुसार, नूह को जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए सन्दूक में ले जाने की व्यवस्था करने को कहा गया था। आकाश में बादल घिरने लगे और वातावरण बदल गया। महाप्रलय शुरू हुआ फिर बारिश शुरू हुई। बारिश लगातार होती रही—40 दिन और 40 रात। पानी बढ़ता गया और धरती के बड़े-बड़े हिस्से पानी में डूब गए। नूह, उसका परिवार और सन्दूक में मौजूद जीव सुरक्षित रहे। सन्दूक पानी पर तैरता रहा बारिश रुकने के बाद भी लंबे समय तक पानी पृथ्वी पर रहा। सन्दूक पानी के ऊपर तैरता रहा। नूह और उसका परिवार प्रतीक्षा करता रहा कि कब पानी कम होगा और वे फिर से धरती पर कदम रख सकेंगे। कौआ और कबूतर नूह ने यह पता लगाने के लिए एक कौआ भेजा। बाद में उसने एक कबूतर भेजा। पहली बार कबूतर को सूखी जगह नहीं मिली और वह वापस लौट आया। कुछ समय बाद नूह ने फिर कबूतर भेजा। इस बार वह अपनी चोंच में जैतून की पत्ती लेकर वापस आया। नूह समझ गया कि धरती पर पानी कम हो रहा है। जब उसने तीसरी बार कबूतर भेजा, तो वह वापस नहीं आया। सन्दूक से बाहर निकलना आखिरकार परमेश्वर ने नूह से कहा कि वह अपनी पत्नी, अपने पुत्रों और उनकी पत्नियों के साथ सन्दूक से बाहर आए। सभी जानवर भी सन्दूक से बाहर निकले। कई महीनों के बाद नूह के परिवार ने फिर से सूखी धरती पर कदम रखा। नूह ने वेदी बनाई धरती पर आने के बाद नूह ने परमेश्वर के लिए एक वेदी बनाई और आराधना की। परमेश्वर ने नूह और उसके परिवार के साथ एक विशेष वाचा (covenant) स्थापित की। परमेश्वर ने वादा किया कि वह फिर कभी इस प्रकार के जलप्रलय से पृथ्वी के सभी जीवों का नाश नहीं करेगा। इंद्रधनुष का चिन्ह 🌈 परमेश्वर ने अपनी वाचा के चिन्ह के रूप में बादलों में इंद्रधनुष रखा। इंद्रधनुष परमेश्वर के उस वादे की याद दिलाने वाला चिन्ह बना कि पृथ्वी को फिर कभी ऐसे जलप्रलय से नष्ट नहीं किया जाएगा। नूह की कहानी का अंत नूह ने जलप्रलय के बाद बहुत वर्षों तक जीवन बिताया। उसके तीन पुत्रों—शेम, हाम और येपेत—से आगे मानव परिवारों की पीढ़ियाँ फैलीं। नूह की कहानी का मुख्य संदेश है: मुश्किल समय में विश्वास बनाए रखना, परमेश्वर की चेतावनी को गंभीरता से लेना और आज्ञाकारिता के साथ सही कार्य करना। यह कहानी विशेष रूप से उत्पत्ति 6–9 में पढ़ी जा सकती है।