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राज्य का लोभ या धर्म? | गीता श्लोक 45–46

Vasudev Saar

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राज्य का लोभ या धर्म? | गीता श्लोक 45–46

2 527 просмотров · 1 месяц назад
Vasudev Saar
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भगवद्गीता अध्याय 1 के श्लोक 45–46 में अर्जुन गहरे पश्चाताप में डूब जाते हैं। वे कहते हैं कि राज्य और सुख के लोभ में अपने ही स्वजनों का वध करना महापाप है। वे तो यह भी कहते हैं कि यदि धृतराष्ट्र के पुत्र उन्हें निःशस्त्र अवस्था में मार दें, तो वही उनके लिए अधिक कल्याणकारी होगा। इस वीडियो में जानिए इन दोनों श्लोकों का सरल हिंदी अर्थ, गहरी व्याख्या और जीवन में अपनाने योग्य सीख। 🙏 जय श्रीकृष्ण! अगर वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 📤 | Subscribe 🔔 ज़रूर करें। इस श्लोक से मिली सीख को कमेंट में ज़रूर साझा करें। जय श्री कृष्ण! 🙏 key words:- Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 45 Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 46 Bhagavad Gita Hindi Geeta Gyan in rap song Bhagavad Gita Explained Hindi Motivation Vasudev Saar Gita #bhagavadgita #krishna #spirituality #sanatandharma #geeta #bhagavadgitahindi #vasudevsaar #bhakti #geetagyan