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हवा में उड़ने वाला जादुई रथ: विक्रमादित्य की कहानी

Gauri Relato Lab

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हवा में उड़ने वाला जादुई रथ: विक्रमादित्य की कहानी

5 просмотров · 2 недели назад
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इस वीडियो में सुनिए सिंहासन बत्तीसी की पन्द्रहवीं पुतली सुंदरवती द्वारा सुनाई गई राजा विक्रमादित्य की एक अत्यंत रोचक कहानी। यह कहानी हमें बताती है कि एक महान राजा अपनी प्रजा के हित के लिए किस हद तक जा सकता है। जब उज्जैन के एक परोपकारी सेठ पन्नालाल के बेटे हीरालाल की बारात भारी बारिश और बाढ़ के कारण समुद्र पार विवाह स्थल तक पहुँचने में असमर्थ हो गई, तो राजा विक्रमादित्य ने उनकी मदद की। सेठ पन्नालाल की समस्या सुनकर राजा विक्रमादित्य ने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें अपना पवन वेग से उड़ने वाला जादुई रथ दे दिया। इतना ही नहीं, राजा ने विवाह में कोई बाधा न आए इसलिए माँ काली द्वारा दिए गए अपने बेतालों को भी अदृश्य रूप से रथ की रक्षा के लिए भेज दिया। बेतालों ने बाढ़ के पानी के ऊपर से रथ को उड़ाकर सही समय पर विवाह स्थल तक पहुँचाया। अंत में जब सेठ ने रथ की प्रशंसा की, तो राजा ने वह बहुमूल्य जादुई रथ और घोड़े भी उन्हें उपहार में दे दिए। राजा विक्रमादित्य की दयालुता और प्रजा के प्रति उनके प्रेम की यह कहानी आपको जरूर प्रेरित करेगी। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट करके अपने विचार हमें जरूर बताएं। ऐसी ही और भी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। #SinghasanBattisi #RajaVikramaditya #HindiMoralStories #VikramadityaStory #PutliSundarvati #MythologicalStories #JaduiRath #IndianMythology #HindiKahaniya #AncientStories