आज क्यों मुस्कुरा रही थीं राधा रानी? | श्री हित चौरासी पद 4 | श्री हित हरिवंश | radha vallabh bhajan
Shri Radha Kripa
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आज क्यों मुस्कुरा रही थीं राधा रानी? | श्री हित चौरासी पद 4 | श्री हित हरिवंश | radha vallabh bhajan
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🌸 श्री हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा रचित श्री हित चौरासी के चतुर्थ पद की भक्तिमय प्रस्तुति।
आजु तौ जुवति तेरौ, वदन आनन्द भरयौ,
पिय के संगम के सूचत सुख चैंन ।
आलस-वलित बोल, सुरंग रँगे कपोल,
विथकित अरुण उनींदे दोऊ नैंन ॥
रुचिर तिलक-लेश, किरत कुसुम-केश,
सिर सीमंत भूषित मानौं तैं न ।
करुणाकर उदार, राखत कछु न सार,
दसन-वसन लागत जब देंन ॥
काहे कौं दुरत भीरु, पलटे प्रीतम चीर,
बस किये श्याम सिखै सत मैंन ।
गलित उरसि माल, सिथिल किंकिनी जाल,
(जै श्री) हित हरिवंश लता-गृह सैंन।।
इस पद में सखी श्रीराधा के दिव्य मुख पर झलकते आनंद और प्रेममय माधुर्य का वर्णन करती है। इस प्रस्तुति को सिनेमैटिक शैली में भक्तिभाव के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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🌸 राधे राधे 🌸
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