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Prabhupad Lilamrita - Chapter 14 - अकेले संघर्ष करना

Spiritual Nandini

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Prabhupad Lilamrita - Chapter 14 - अकेले संघर्ष करना

70 просмотров · 4 дн. назад
Spiritual Nandini
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#gita #sprituality #harikatha #bhakti #harekrishna #krishnabhakti #satsang #devotional #trending #iskcon #prabhupada #gaudiyabooks “अकेले संघर्ष करना” इस अध्याय में श्रील प्रभुपाद के न्यूयॉर्क पहुँचने के बाद के शुरुआती संघर्षों का वर्णन है। वे अमेरिका में लगभग अकेले थे और उनके पास न कोई अपना आश्रम था, न अनुयायियों का समूह और न ही पर्याप्त आर्थिक साधन। वे डॉ. राममूर्ति मिश्रा के संपर्क में आए और कुछ समय उनके योगाश्रम में रहे। न्यूयॉर्क की व्यस्त सड़कों पर श्रील प्रभुपाद एक साधारण संन्यासी के रूप में घूमते हुए लोगों से कृष्णभावनामृत की बातें करते और अपने गुरुदेव श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की इच्छा को पूरा करने के लिए पश्चिम में कृष्णभावनामृत का प्रचार करने का प्रयास करते रहे। बाहरी रूप से वे अकेले दिखाई देते थे, लेकिन उनका विश्वास था कि वे वास्तव में अकेले नहीं हैं—श्रीकृष्ण और गुरु महाराज का आशीर्वाद उनके साथ है। अध्याय उनके दृढ़ संकल्प, निर्भीकता, सहनशीलता और गुरु-आज्ञा के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाता है। सीमित साधनों और अनेक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपना प्रचार कार्य जारी रखा। यही संघर्ष आगे चलकर न्यूयॉर्क में कृष्णभावनामृत के केंद्र और भक्तों के निर्माण की आधारभूमि बना। मुख्य संदेश: 🙏 परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि गुरु की आज्ञा और श्रीकृष्ण पर दृढ़ विश्वास हो, तो भक्त अकेला नहीं होता। श्रील प्रभुपाद का जीवन हमें सिखाता है कि गुरु-सेवा, दृढ़ संकल्प और कृष्ण पर पूर्ण निर्भरता के साथ असंभव दिखाई देने वाला कार्य भी संभव हो सकता है।