| रामामृतम् | RAMAMRATAM
Bhagat Bhakti
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20 222 просмотра · 6 мес. назад
Bhagat Bhakti
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Welcome to Bhagat Bhakti.
We are here with soulful Bhajans that bring you towards "PARMATMA GURU"
This Bhajan Beautifully conveys The devotee's yearning for Guru Ram's presence in their life.
More Bhajans are releasing Soon and We Can't wait for you all to listen And Dive To The Ocean Of Devotion
"Devotion to Salvation"
"भक्ति से मुक्ति"
भगत भक्ति में आपका स्वागत है।
हम आपके लिए ऐसे भावपूर्ण भजन लेकर आये हैं जो आपको "परमात्मा गुरु" की ओर ले जाएंगे।
यह भजन भक्तों की अपने जीवन में गुरु राम की उपस्थिति की लालसा को खूबसूरती से व्यक्त करता है।
और भी भजन जल्द ही रिलीज़ हो रहे हैं और हम अब आप सभी के सुनने और भक्ति के सागर में गोते लगाने का इंतज़ार नहीं कर सकते |
Song Details:-
Voice - Hitesh Jaroli
Music , Arrangement & Mixing - Akhil Ji Purohit
Recorded At - Shree Raati Music Studio, Nathdwara
Graphics and Video Editing - Sumit Bhandari
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Lyrics :-
आत्मध्यान का शुभ अवसर यह, परम भाग्य से पाया है।
वीर वचन श्री सद्गुरु सेवा, जिनशासन की छाया है।। 1 ।।
आत्म भाव में रमण करूँगा, दृढ़ संकल्प ये धारा है।
क्षमा विनय संतोष सरलता, आत्म रमण ही प्यारा है।। 2 ।।
धम्मं धम्मं धम्मं धम्मं, प्राणों से भी प्यारा है।
पुद्गल सारे मूल्यहीन हैं, धर्म अमूल्य हमारा है।। 3 ।।
वीरं वीरं वीरं वीरं, मोह शत्रु पर जय मेरी।
क्रोध मान मद माया, तृष्णा भाग रहे सुन जय भैरी।। 4 ।।
सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं, बोध सघन यह हो जाए।
तू सो प्रभु प्रभु सो तू है, भेद कल्पना मिट जाए।। 5 ।।
बुद्धं बुद्धं बुद्धं बुद्धं, बोध सुलभ प्रगटाता है।
सब प्रश्नों का हल है भीतर, यह विश्वास जगाता है।। 6 ।।
शुद्धं शुद्धं शुद्धं शुद्धं, शुद्धि हो शाश्वत सिद्धि।
दृष्टि शुद्धं सृष्टि शुद्धं से विकसे बुद्धि।। 7 ।।
शांतं शांतं शांतं शांतं, शांति सदा ही साथ रहे।
मान अमान में सुख में दुख में, शांत थामे हाथ रहे।। 8 ।।
अर्हम अर्हम अर्हम अर्हम, अर्हम शक्ति जगाता है।
भय चिंता अरु शोक दूर कर पूर्णानंद प्रदाता है।। 9 ।।
शरणं शरणं शरणं शरणं पावन सद्गुरु शरणं है।
गुरु कृपा से सफल साधना श्रद्धा ये अति दृढ़तम है।। 10 ।।
"रामामृतम्" सुदिव्य साधना से समता रस बहता है।
सबका हित कल्याण हो, सबका अंतर मन यह कहता है।। 11 ।।
समो समो का जाप करो नित, दुखमय यह संसार तीरों।
जय साधना प्रतिपल साधो, तृप्ति सुख अविराम वरो।। 12 ।।
रामामृत का पान करो।।
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