खिड़की की रोटी और कुबड़े का सत्य | जो अच्छा करोगे वो लौट के आएगा | माँ ने रोटी में ज़हर मिलाया फिर?
moti singh Rathore
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खिड़की की रोटी और कुबड़े का सत्य | जो अच्छा करोगे वो लौट के आएगा | माँ ने रोटी में ज़हर मिलाया फिर?
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moti singh Rathore
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लघु कथा*
एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और साथ ही एक रोटी अतिरिक्त वहाँ से गुजरने वाले किसी भूखे के लिए भी पका दिया करती थी। वह उस रोटी को खिड़की के सहारे प्रतिदिन रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था।
एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।"
दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा। वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और क्रोधित होकर उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया। जैसे ही उसने रोटी को खिड़की पर रखने की कोशिश की, अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये - "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे की आँच में जला दिया। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी।
हर रोज़ की तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के वही बड़बड़ाता हुआ चला गया।
हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र की सलामती के लिए प्रार्थना करती थी, जो अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी।
ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है। वह दरवाजा खोलती है और भौंचक्की रह जाती है। अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है - पतला, दुबला, फटे कपड़े, भूख से कमज़ोर।
बेटे ने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ। आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं भूख से गिर गया। मर जाता। लेकिन तभी एक कुबड़ा वहाँ से गुज़र रहा था। उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने उससे खाने को कुछ माँगा। उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- *"मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है।"*"
जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया। उसके मस्तिष्क में वह बात घूमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत?
और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चुका था - जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।
शिक्षा: हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो।
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